संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऑस्ट्रिया, किर्गिस्तान, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो, तथा जिम्बाब्वे को 2027-28 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना है। भारत ने इन देशों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में इनके साथ करीबी सहयोग होगा। बुधवार देर रात हुए इस चुनाव में 193 सदस्यीय महासभा ने पांच नए गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव किया गया। गौरतलब है कि 2026 के अंत में डेनमार्क, ग्रीस, पाकिस्तान, पनामा और सोमालिया की जगह लेंगे।

राजदूत पी हरीश ने नए सदस्य देशों से क्या कहा?
भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने एक्स हैंडल पर लिखे आधिकारिक संदेश में नए सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत इन देशों के साथ काम करने की इच्छा रखने के अलावा उत्सुक भी है। बता दें कि गोपनीय मतदान के माध्यम से चुने गए इन सदस्य देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।
जर्मनी का बाहर होने बड़ा झटका क्यों?
पश्चिमी यूरोपीय और अन्य राज्यों के समूह में जर्मनी को बड़ा झटका लगा, जहां उसने 104 वोट प्राप्त किए, जबकि पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले। परिणामों की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष और पूर्व जर्मन विदेश मंत्री अन्नालेना बेयरबॉक ने की।
UN में नुकसान को लेकर जर्मनी ने क्या कहा?
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडेफुल ने इस परिणाम को ‘वास्तविक निराशा’ बताया। उन्होंने कहा कि जर्मनी ने देर से चुनाव में भाग लिया, जिससे उसे नुकसान हुआ। उन्होंने यूक्रेन के प्रति समर्थन और इस्राइल के संबंध में जर्मनी की स्पष्ट स्थिति को भी चुनावी हार का कारण बताया। अफ्रीका और एशिया-प्रशांत राज्यों के दो पदों के लिए दक्षिण पूर्व अफ्रीका में बसे देश जिम्बाब्वे को 182 और किर्गिस्तान को 142 वोट मिले। किर्गिस्तान पहली बार सुरक्षा परिषद (UNSC) में शामिल होगा। उसने फिलीपींस को 142-49 के अंतर से हराया। लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई राज्यों के समूह में त्रिनिदाद और टोबैगो को 181 वोट मिले।
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UNSC में कितने सदस्य देश, भारत कब रहा गैर-स्थायी सदस्य?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें पांच स्थायी सदस्य—चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं। अगले वर्ष नए चुने गए सदस्य पी5 देशों के साथ बहरीन, कोलंबिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लातविया और लाइबेरिया के साथ परिषद में शामिल होंगे, जो 2027 के अंत तक अपनी अवधि पूरी करेंगे। भारत ने 2021-22 में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में परिषद की सदस्यता निभाई थी। अगली बार भारत 2028-29 में सदस्य बन सकता है। भारत अपनी उम्मीदवारी घोषित कर चुका है।

