पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों के बगावत कर नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जाने के दावे ने ममता बनर्जी की पार्टी को गहरे संकट में डाल दिया है। इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टीऔर कांग्रस समते कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस मुद्दे पर किसने क्या कहा?
फिरोजाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रामगोपाल यादव ने कहा कि जिन लोगों को ममता बनर्जी ने कूड़ेदान से उठाकर मंत्री, विधायक और सांसद बनाया, वे ही अब उन्हें धोखा दे रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा क्षेत्रीय दलों को खत्म करने के बजाय संविधान को कमजोर कर रही है और देश को बांटने की दिशा में काम कर रही है।
क्या काकोली घोष दस्तीदार ने एनडीए को समर्थन देने का एलान किया?
बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि टीएमसी के 20 सांसद एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की मांग की है। हम नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी में विलय कर रहे हैं और आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेंगे। दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं।
क्या अरूप चक्रवर्ती ने ममता और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए?
बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने टीएमसी नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव क्या सिर्फ दीदी ने लड़ा था या हमने भी लड़ा था? जनता ने वोट किसे दिया? कोई भी पार्टी किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी परिवार के दबाव में काम कर रही थीं और पार्टी का पतन तब शुरू हुआ जब जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को सौंपी गई। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी नेतृत्व बैठक बुलाने से क्यों डर रहा है और पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक चर्चा क्यों नहीं हो रही।
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क्या अशोक गहलोत ने भाजपा और विपक्ष दोनों को संदेश दिया?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा कि इंडिया गठबंधन को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का नेता घोषित किया जाना चाहिए। गहलोत ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा जैसी पार्टी पर प्रतिबंध लगा देतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर देश को कमजोर कर रही है। साथ ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।
क्या आसित कुमार माल ने टीएमसी नेतृत्व पर सवाल उठाए?
बागी सांसद आसित कुमार माल ने पार्टी छोड़ने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि 20 लोकसभा सांसदों ने जनता और क्षेत्रीय विकास के हित में नया समूह बनाया है। हमें लगता है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचेगा, इसलिए हम उसका समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी अब अस्तित्व में नहीं दिखती। पार्टी में रहकर विकास करना संभव नहीं है। मल ने यह भी कहा कि चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व ने कोई समीक्षा बैठक नहीं की और पार्टी के टूटने की जिम्मेदारी नेतृत्व को लेनी चाहिए।
क्या एनसीपीआई ने बागी सांसदों का स्वागत किया?
एनसीपीआई के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु डे ने कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने कहा, “अगर मेरी पार्टी बढ़ती है तो मुझे खुशी क्यों नहीं होगी। मैं चाहता हूं कि पार्टी आगे बढ़े और देश के लिए काम करे। हम प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हैं और एनडीए के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी।
क्या बंगाल की राजनीति में यह सबसे बड़ा संकट बन सकता है?
टीएमसी के 20 सांसदों की बगावत के दावे ने ममता बनर्जी के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। यदि सांसदों का यह समूह औपचारिक रूप से अलग हो जाता है, तो लोकसभा में टीएमसी की ताकत पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं, एनडीए को समर्थन देने की घोषणा ने इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब सभी की नजर संसद के अगले सत्र और टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

