हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार हरे निशान पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित नरमी के बाद वैश्विक बाजारों को बढ़ावा मिला। इससे फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं।
सेंसेक्स 564.20 (0.73%) बढ़कर 77,619.14 अंक पर पहुंच गया। निफ्टी 142.05 (0.59%) की बढ़त के साथ 24,194.10 अंक पर कारोबार करता दिखा। अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों ने सकारात्मक रुझान दिखाया। यह बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत था। वित्तीय, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और रसायन क्षेत्र बढ़त में रहे। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और उपभोक्ता केंद्रित क्षेत्र भी मजबूत बने रहे। सूचना प्रौद्योगिकी, धातु और मीडिया क्षेत्रों ने कमजोर प्रदर्शन किया। ये क्षेत्र बाजार की सकारात्मक धारणा के बीच कमजोरी के एकमात्र क्षेत्र बनकर उभरे। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे मजबूत होकर 96.10 पर पहुंच गया।
बाजार में यह तेजी क्यों आई?
भारतीय शेयर बाजार में यह उछाल अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित नरमी के कारण आया। अमेरिका में महंगाई दर धीमी होने से फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो गई। इस खबर ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बनाया। निवेशकों का भरोसा बढ़ा और उन्होंने भारतीय शेयरों में जमकर खरीदारी की।
किन क्षेत्रों ने बाजार को ऊपर उठाया?
बाजार में व्यापक खरीदारी देखी गई, लेकिन कुछ क्षेत्रों ने विशेष रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। वित्तीय क्षेत्र, निजी बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे आगे रहे। रसायन क्षेत्र के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और उपभोक्ता केंद्रित क्षेत्रों ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी, धातु और मीडिया जैसे कुछ क्षेत्रों ने कमजोर प्रदर्शन किया।


