टाइप-1 डायबिटीज के इलाज में वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने तीन ऐसे मरीजों का सफल इलाज किया, जिनमें इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी थीं। इनमें से एक मरीज को उसकी अपनी स्टेम सेल से तैयार इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं प्रत्यारोपित की गईं, जबकि दो मरीजों को डोनर स्टेम सेल से विकसित कोशिकाएं दी गईं। उपचार के बाद तीनों में ब्लड शुगर नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया और मरीजों के शरीर में दोबारा इंसुलिन बनने के संकेत मिले।
शोधकर्ताओं ने क्या-क्या कहा?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन टाइप-1 डायबिटीज के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया है कि अभी यह शुरुआती चरण का शोध है और इसे नियमित इलाज का हिस्सा बनने से पहले बड़े क्लीनिकल ट्रायल में सफल साबित करना होगा। शोध दुनिया की प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पहली बार मरीज की अपनी स्टेम सेल से तैयार इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं का सफल उपयोग एक से अधिक मरीजों के लिए किया गया।
अपनी कोशिकाओं का इस्तेमाल करने से भविष्य में प्रत्यारोपण के बाद शरीर द्वारा कोशिकाओं को अस्वीकार करने का खतरा कम हो सकता है। इसके साथ ही, दो मरीजों में डोनर स्टेम सेल से तैयार कोशिकाओं का भी सफल इस्तेमाल किया गया, जिससे यह तकनीक अलग-अलग परिस्थितियों में कारगर हो सकती है।