लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

Share Market: शेयर बाजार में हड़कंप, चार दिन में 13 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान; क्याें घबराए निवेशक?

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

  • चौथे दिन भारतीय शेयर बाजार गिरा, ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा.
  • कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, वैश्विक आपूर्ति पर चिंताएं.
  • निवेशकों के ₹13.43 लाख करोड़ डूबे, कई सेक्टर प्रभावित.

Share Market Latest Updates: भारतीय शेयर बाजार में बीते लगातार चौथे दिन से गिरावट जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने निवेशकों की टेंशन बढ़ा दी है. आज गुरुवार को भी शुरुआती कारोबार में BSE का सेंसेक्स  239 अंक से ज्यादा लुढ़क गया. वहीं, निफ्टी भी गिरावट के साथ 23908 पर खुला. दरअसल, निवेशक कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर परेशान हैं.

निवेशकों को किस बात का सता रहा डर?

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया है. होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए सप्लाई पहले से ही ठप्प है. अब चूंकि लाल सागर भी रिस्क जोन में आ गया है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर एक बार फिर से परेशानियां बढ़ने लगी हैं.

यही वजह है कि आज ब्रेंट क्रूड 2.27% उछलकर 96.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर जा पहुंचा. यानी कि यह एक बार फिर से 100 डॉलर के करीब पहुंच रहा है. कच्चे तेल की कीमतों का इस तेजी से बढ़ना महंगाई और ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ पर असर डाल सकता है.

कल भी बाजार में आई थी गिरावट 

कल यानी कि 22 जुलाई को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. इस दौरान सेंसेक्स 715 अंकों की गिरावट के साथ 76755.05 के स्तर पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी भी 191 अंक फिसलकर 23996.25 पर बंद हुआ. इस दिन बाजार निवेशकों को लगभग 4.25 लाख करोड़ का नुकसान पहुंचा. कारोबारी सेशन में बिकवाली कुछ इस कदर हावी रही कि BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप महज एक ही दिन में 484.29 लाख करोड़ से गिरकर 480.05 लाख करोड़ पर जा पहुंचा. चूंकि आज भी बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहा है इसलिए गिरावट का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो गया है. 

4 दिन में कितने करोड़ डूबे?

बीते लगातार चार दिनों से शेयर बाजार में भयंकर बिकवाली के चलते सेंसेक्स अपने ऊपरी स्तर से लगभग 2200 अंक और निफ्टी 500 अंकों से ज्यादा टूट चुका है. बताया जा रहा है इन चार दिनों में निवेशकों के 13.43 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं. इनमें बुधवार यानी कि कल सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों को पहुंचा है. खासतौर पर, HDFC बैंक और Infosys के निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है. HDFC बैंक के कमजोर तिमाही नतीजों और नेट इंटरेस्ट मार्जिन के दबाव के चलते इसके शेयरों में बिकवाली देखी गई. 

दबाव में फार्मा सेक्टर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 100-200% टैरिफ की धमकियों के बाद Cipla और Dr Reddy’s जैसी कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरे. क्रूड ऑयल के 96 डॉलर के पार जाने पर IndiGo और HPCL जैसी कंपनियों के भी शेयर गिरे क्योंकि इनका इनपुट कॉस्ट जो बढ़ गया है. साथ ही अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी, डॉलर और रुपये में अस्थिरता का असर टेक कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला.

जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ा है. रुपया कमजोर होने से इंपोर्ट महंगा हो जाता है और इससे महंगाई भी बढ़ सकती है. इसने विदेशी निवेशकों की सोच पर भी असर डाला है, जिसके चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में सावधानी के साथ ट्रेडिंग हो रही है. निवेशक इन दिनों अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मेकिंग पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं. फेड रिजर्व के ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखने की ही उम्मीदें लगाई जा रही हैं, जिसके चलते US ट्रेज़री यील्ड बढ़ गई है. ऐसे में उभरते बाजारों के मुकाबले US एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो गए हैं. इससे जोखिम लेने की इच्छा कम हुई है और भारत जैसे बाजारों पर दबाव पड़ा है.

ये भी पढ़ें:

पाकिस्तान ने अमेरिका से मांग लिए 96000 करोड़ रुपये, आखिर एकाएक क्यों पड़ गई इतने पैसों की जरूरत? 

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment