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खतरे की आहट! भारत ने बढ़ाया अपना LPG प्रोडक्शन, रिफाइनरियों को नया टारगेट

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  • होर्मुज तनाव के कारण भारत ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाया.
  • खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाई, अमेरिका प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना.
  • अमेरिका से एलपीजी आयात अब 50% से अधिक हुआ.
  • अमेरिकी आयात में समय अधिक, दीर्घकालिक अनुबंध किए गए.

होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के बीच भारत ने अपना LPG उत्पादन लगभग 4000 टन बढ़ा रहा है ताकि आगे आने वाले समय में सप्लाई में कोई रुकावट न आए. इस बदलाव का मकसद होर्मुज के पारंपरिक शिपिंग रूट पर निर्भरता को कम करना है. होर्मुज के आसपास अभी अस्थिरता का माहौल है.

इस बीच, भारत की कोशिश है अपनी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई को स्थिर रखना. देश की रिफाइनरियां पहले से ही अपने सामान्य स्तर (37,000 से 38,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन) से अधिक काम कर रही हैं और अब रोज के हिसाब से इसमें लगभग 4,000 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी करने जा रही हैं.  इस 4,000 टन की दैनिक बढ़ोतरी के साथ ही रिफाइनरियों का मौजूदा उत्पादन स्तर उनके सामान्य बेस लेवल से 10% से भी ऊपर जा चुका है. 

खाड़ी देशों पर कम हुई निर्भरता

भारत पारंपरिक रूप से यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से अपनी 90% एलपीजी लेता था, जिसकी सप्लाई होर्मुज के रास्ते से की जाती थी. अब जब इस रूट पर तनाव का माहौल बना हुआ है इसलिए सरकार और तेल कंपनियों को इम्पोर्ट के अलग-अलग रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं.

सप्लाई चेन में पहले ही एक बड़ा बदलाव दिख रहा है. अब भारत के LPG इंपोर्ट का 50% से ज्यादा हिस्सा अमेरिका से आता है, जबकि 2026 की शुरुआत में तनाव बढ़ने से पहले यह हिस्सा 10% से भी कम था. 

अमेरिका बना बड़ा सोर्स

मार्च से अगस्त के बीच बीते छह महीनों में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 53% तक पहुंच गई है, जबकि ईरान में जंग से पहले भारत अपनी जरूरत का 7.9% हिस्सा ही अमेरिका से मंगाता था. हालांकि, नई सप्लाई रूट की अपनी कई चुनौतियां भी हैं. पहले खाड़ी देशों से टैंकर को भारत आने में महज 3-4 दिन लगते थे.

अब अमेरिका के ह्यूस्टन से पनामा नहर या अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से घूमकर आने वाले जहाजों को भारत पहुंचने में 30 से 45 दिन का समय लग रहा है. इससे माल ढुलाई और स्टोरेज दोनों की लागत बढ़ी है. इस बीच, सरकार ने इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को लॉन्ग-टर्म सुरक्षा के लिए 2027 के अपने कुल आयात का कम से कम 15% से 25% हिस्सा अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं से सालाना अनुबंध (annual contracts) के जरिए पहले ही सुरक्षित कर लेने का निर्देश दिया है.

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