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RBI ने प्लास्टिक करेंसी की टेस्टिंग के लिए 10 और 20 रुपए के नोटों को ही क्यों चुना?

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Plastic Currency: RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ जल्द ही 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू करने वाला है. इन्हें पॉलिमर नोट भी कहा जाता है, जो कागज के नोटों से अलग होते हैं. ये प्लास्टिक करेंसी के नाम से भी जाने जाते हैं जो ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं. भारत से पहले कई ऐसे देश हैं जो इस प्लास्टिक करेंसी के इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में इस समय महज परीक्षण के लिए नोट बनाए जा रहे हैं. इसके लिए 10 और 20 रुपये के नोट को चुना गया है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि RBI ने इसके लिए सिर्फ 10 और 20 रुपये के नोटों को ही क्यों चुना है? नहीं सोचा होगा ना, तो आइये हम आपको बताते हैं.

10 और 20 रुपये के नोट ही क्यों चुने गए?
दरअसल भारत में चलने वाले कुल नोटों की संख्या में 10 और 20 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है. हालांकि कुल पैसों की वैल्यू में इनका हिस्सा सिर्फ 1.4 प्रतिशत है. यानी ये नोट बड़ी संख्या में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इनमें ज्यादा पैसा नहीं होता. इसलिए RBI के लिए इनसे ट्रायल शुरू करना कम जोखिम वाला कदम है.

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ट्रायल के दौरान क्या देखा जाएगा?
इन नोटों को फिलहाल केवल ट्रायल के लिए ही लाया जा रहा है. ऐसे में इनके बाजार में आने के बाद कुछ चीजों को नोटिस किया जाएगा, इसके बाद ही आगे बड़े नोट यानी 50, 100, 200 और 500 के नोट प्लास्टिक करेंसी में कंवर्ट किए जाएंगे. ट्रायल के दौरा इन चीजों पर मुख्य रूप से नजर होगा:

  • प्लास्टिक नोट कितने समय तक चलते हैं.
  • जनका के बीच ये कितने प़पुलर होते हैं.
  • इन्हें छापना कितना आसान और प्रभावी है.
  • इनकी सुरक्षा कितनी मजबूत है.
  • नकली नोट बनाने वाले इनकी नकल कर पाते हैं या नहीं.

बता दें कि RBI ने करीब 15 साल पहले भी पॉलिमर नोट शुरू करने की कोशिश की थी. साल 2009 में इसका ट्रायल किया गया था, लेकिन तकनीकी परेशानियों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी. अब RBI एक बार फिर इस पर काम कर रहा है. अगर इस बार ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में पूरी तरह से प्लास्टिक करेंसी पर निर्भर होने के बारे में सोचा जाएगा.

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