
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में जहां एक तरफ कल पाकिस्तान और चीन के कब्जे से आजादी के नारे लगे थे तो आज प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, पीओके के प्रधानमंत्री फ़ैसल मुमताज़ राठौड़ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को कलादम यानी आतंकी बताया. साथ ही अवामी एक्शन कमेटी के नेता ने कहा कि जिन कबाइलियों ने 1947 में पीओके पर जबरन कब्जा किया था, जमीन कब्जाई थी वो भी आज पीओके के प्रदर्शनकारियों के साथ है. भीड़ को संबोधित करते हुए अवामी एक्शन कमेटी के नेता के कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है जब प्रदर्शनकारियों का साथ जम्मू, गिलगित बाल्टिस्तान और लद्दाख दे रहा है.
पाकिस्तान की क्रूर हुकूमत को चेतावनी देते हुए अवामी एक्शन कमेटी के नेता ने कहा कि ये सिंध, बलूचिस्तान, डी चौक नहीं है ये कश्मीर है जहां एक लाश गिरती है तो लाखों लोग सड़कों पर आते हैं. पीओके में पिछले मंगलवार से चल रहे प्रदर्शनों में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन क्रूर पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी रावलाकोट डटे हुए हैं और पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ बगावती रुख अपनाए हुए हैं.
पाकिस्तानी सेना और हुकूमत के खिलाफ बगावत
हालांकि पाकिस्तानी सेना और हुकूमत के खिलाफ बगावत में अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं में मतभेद भी साफ नजर आ रहे हैं जहां सरदार अमान खान और ख्वाजा मेहरान खुलेआम बगावती रुख अपनाए हुए पीओके की आजादी की मांग कर रहे हैं और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं तो उमर नज़ीर और शौकत नवाज मीर पाकिस्तानी हुकूमत के साथ नर्म रुख अपना कर मांगों को लेकर बातचीत की कोशिश कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों की 2 मांग क्या हैं?
प्रदर्शनकारियों की 2 मांग पर पेंच फंसा हुआ है पहला पीओके के अंदर 12 कथित शरणार्थी सीट पर जिसे जानता खत्म करने की मांग कर रही है और दूसरा पीओके के निर्वाचित नेताओं की शपथ पर जिसमें पाकिस्तान के प्रति वफादारी के जगह जानता मांग कर रही है इसे बदल कर जम्मू कश्मीर की एकता के प्रति वफादारी की जाए क्योंकि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है.
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