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Moldy Juice: फफूंदी वाला जूस पीने से टूटा व्रत, कोर्ट ने डाबर पर ठोक दिया 70000 का जुर्माना, पढ़ें मामला

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Moldy Juice News: क्या आपने कभी सुना है कि खराब जूस पीने की वजह से किसी को 70 हजार रुपये मिले हैं? हां ऐसा कुछ हाल ही में हुआ है. हिमाचल प्रदेश में एक शख्स ने डाबर कंपनी का मौसंबी जूस व्रत के मौके पर पीने के लिए लिया था. लेकिन उस जूस में फंगस थी, जिसके बारे में शख्स को बाद में पता चला और उसका व्रत टूट गया. इससे आहत होकर उसने कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर दी.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला साल 2024 का है जब कांगड़ा के रहने वाले हिमांशु मिश्रा, आरती सूद और नारायण ठाकुर ने सावन के महीने में रियल का मौसंबी जूस खरीदा. ये जूस पीने के बाद उन्हें पता चला कि इसमें फंगस थी. जिससे उनका व्रत टूट गया और वे बीमार भी पड़ गए. पैक में जूस की एक्सपायरी डेट नवंबर 2024 थी, जबकि जूस की मैन्यूफैक्चरिंग मई में हुई थी और जुलाई में इसे खरीदा गया था. इस केस से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और मानसिक तनाव भी हुआ. जिसके बाद तीनों ने मिलकर हिमाचल प्रदेश के कंज्यूमर कोर्ट में कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई.

हालांकि जब डाबर कंपनी में इसकी शिकायत की गई तो उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया, यहां तक कि कंपनी ने ये तक बोला कि पैकेट शिकायतकर्ताओं के द्वारा बदल दिया गया है.

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क्या बोला कोर्ट?
उपभोक्ता की शिकायत के बाद आयोग ने इस मामले पर कहा कि, शिकायतकर्ता ने सुनवाई के दौरान जूस का सीलबंद टेट्रा पैक आयोग के सामने पेश किया था. आयोग की निगरानी में उस जूस का सैंपल जांच के लिए लैब भेजा गया. जांच में जूस के अंदर फफूंदी जैसी गंदी गांठें (मोल्ड) मिलीं. लैब ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये जूस पीने के लिए सुरक्षित नहीं है.

आयोग ने ये भी कहा कि पैक पर ग्रीन डॉट दिया गया था, लेकिन जूस में फफूंदी मिलना इस दावे के उलट है. आयोग ने कहा कि इससे एक शाकाहारी परिवार की धार्मिक और भावनात्मक भावनाओं को भी ठेस पहुंची है. इसके लिए ये साबित करना जरूरी नहीं कि जूस पीने से कोई शारीरिक बीमारी हुई हो.

आयोग ने ठोका कंपनी पर जुर्माना
आयोग ने माना कि दुकानदार ने जूस उसी सीलबंद पैक में बेचा था और फफूंदी फैक्ट्री में पैकिंग के दौरान ही पनपी थी. इसलिए ये मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग डिफेक्ट है, जिसकी जिम्मेदारी कंपनी की है. आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए कंपनी को 60,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया. साथ ही कहा कि ये राशि 45 दिनों के अंदर ही अदा की जाना चाहिए.

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