पिछले दो सालों में भारतीय आईटी सेक्टर ने तेज बदलाव देखा है. महामारी के बाद जबरदस्त भर्ती करने वाली कंपनियां अब AI, ऑटोमेशन और कमजोर वैश्विक मांग के कारण लागत घटाने पर जोर दे रही हैं. इसी वजह से FY26 में कई बड़ी कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या कम की, जबकि नई भर्ती की रफ्तार भी धीमी पड़ गई.
इस साल कितनी हुई छंटनी?
FY26 में भारत की पांच बड़ी IT कंपनियों यानी टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा का कुल कर्मचारी काउंट घटा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन कंपनियों में करीब 7,000 कर्मचारियों की टोटल कमी दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष FY25 में इन्हीं कंपनियों ने 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों की नेट भर्ती की थी. सबसे बड़ा असर टीसीएस में देखने को मिला, जहां वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग की गई.
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अब अप्रेजल कैसे हो रहा है?
छंटनी के बावजूद कंपनियों ने पूरी तरह सैलरी बढ़ाना बंद नही किया है, लेकिन पहले की तुलना में अप्रेजल काफी कम हो गया है. जैसे टीसीएस ने प्रदर्शन आधारित सैलरी हाइक पर जोर दिया है. Infosys भी चुनिंदा कर्मचारियों का परफॉर्मेंस के बेसिस पर वेतन बढ़ा रही है. AI और डिजिटल स्किल्स वाले कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं.
वहीं, HCLTech स्किल-बेस्ड रिवार्ड्स और क्रिटिकल टैलेंट रिटेंशन पर फोकस कर रही है. विप्रो का अप्रेजल पूरी तरह व्यावसायिक प्रदर्शन और व्यक्तिगत मूल्यांकन पर आधारित है. टेक महिंद्रा लागत के साथ अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोगों को अप्रेजल दे रही है. अब IT सेक्टर में One-size-fits-all अप्रेजल का दौर लगभग खत्म हो चुका है. अच्छे स्किल और प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को ही अधिक बढ़ोतरी मिल रही है.
सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव आया?
पहले जहां फिक्स्ड सैलरी बढ़ाने पर जोर रहता था, वहीं अब कंपनियां वेरिएबल पे, परफॉर्मेंस बोनस और स्किल इंसेंटिव पर अधिक फोकस कर रही हैं. AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा इंजीनियरिंग और जेनरेटिव AI जैसी तकनीकों में माहिर कर्मचारियों को बेहतर पैकेज मिल रहे हैं, जबकि पुराने IT सपोर्ट और मेंटेनेंस प्रोफाइल में वेतन वृद्धि काफी लिमिटेड है.
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हायरिंग हो गई बंद?
हायरिंग पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन कंपनियों में पहले जैसी बल्क हायरिंग देखने को नहीं मिल रही है. फ्रेशर्स को ले रहे हैं, लेकिन संख्या लिमिटेड है. लैटरल हायरिंग में कमी आई है. AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई तकनीकों में भर्ती जारी है. मिड लेवल मैनेजमेंट में नियुक्ति काफी धीमी हो गई है. कई कंपनियां अब कम लोगों से ज्यादा काम लेने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. यही कारण है कि हायरिंग की रणनीति भी बदल रही है.
पिछले साल और इस साल में कितना अंतर?
| पिछले साल (FY25) | इस साल (FY26) |
| 12,000 से अधिक नेट हायरिंग | करीब 7,000 की कर्मचारियों में कमी |
| नॉर्म अप्रेजल साइकिल | लिमिटेड और प्रदर्शन आधारित अप्रूवल |
| बड़े पैमाने पर कैंपस हायरिंग | चुनिंदा भर्ती और कौशल बेस्ड भर्ती |
| हेडकाउंट बढ़ाने पर फोकस | उत्पादकता और एआई पर फोकस |
| पुराने आईटी रोल्स की सबसे अधिक मांग | एआई और डिजिटल स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग |
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कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
IT सेक्टर पूरी तरह मंदी में नहीं है, बल्कि बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जिन कर्मचारियों के पास AI, क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों की स्किल है, उनके लिए अवसर अभी भी मौजूद हैं. वहीं पुराने प्रोफाइल में काम करने वालों के लिए रीस्किलिंग और अपस्किलिंग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है.

