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केंद्र सरकार ने पैसेंजर गाड़ियों के लिए CAFE-3 नियमों के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। ये नियम 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक यानी पांच साल के लिए लागू रहेंगे। 30 सितंबर को सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी की है।
नए नियमों के मुताबिक, किसी कार कंपनी के ओवरऑल एवरेज की गणना करते समय एक इलेक्ट्रिक कार को तीन कारों के बराबर गिना जाएगा। यह नियम सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के तहत आने वाली M1 कैटेगरी पैसेंजर गाड़ियों पर लागू होगा।
इन नियमों का मुख्य मकसद गाड़ियों का माइलेज बढ़ाना और प्रदूषण (CO2) को कम करना है। इन नियमों के आने के बाद ऑटो कंपनियों को अपनी गाड़ियों के पोर्टफोलियो में ज्यादा माइलेज देने वाली पेट्रोल-डीजल कारों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक (EV) और हाइब्रिड गाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी होगा।
क्या हैं CAFE नियम और कैसे होती है इनकी गणना?
CAFE कार कंपनियों के लिए सरकार द्वारा तय किए गए माइलेज और प्रदूषण के नियम हैं। इसके तहत किसी एक साल में कंपनी की बिकी सभी गाड़ियों के औसत वजन, तेल की खपत और उनसे निकलने वाले धुएं को मिलाकर कुल स्कोर निकाला जाता है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कंपनी की हर एक कार को तय माइलेज देना ही होगा। बल्कि कंपनी की बेची गई सभी छोटी कारों, बड़ी एसयूवी, हाइब्रिड और ईवी का ‘कुल औसत’ (ओवरऑल एवरेज) सरकार के तय नियमों के अंदर होना चाहिए।


