क्या कच्चा दूध पीना इतना खतरनाक हो सकता है कि इंफेक्शन सीधे हार्ट तक पहुंच जाए और मामला हार्ट फेलियर तक पहुंच जाए? सुनने में यह थोड़ा चौंकाने वाला लग सकता है लेकिन डॉक्टर शालिनी सिंह ने 33 साल के एक युवक का ऐसा ही केस शेयर किया है.

डॉक्टर शालिनी सिंह के मुताबिक, शख्स छुट्टियां मनाने अपने गांव गया था और वहां उसने भैंस का कच्चा दूध पी लिया. गांव से लौटने के कुछ दिनों बाद उसे बुखार, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होने लगी. शुरुआत में जांच में कोई बड़ी परेशानी नहीं दिखी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ने लगी. जांच में उसके WBC यानी श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ी हुई मिली. दवा लेने के बावजूद करीब 10-15 दिन तक बुखार बना रहा. कमजोरी इतनी बढ़ गई कि रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगे.
इसके बाद उसे दिल की धड़कन तेज महसूस होने लगी और थोड़ा सा चलने पर ही सांस फूलने लगी. करीब 20 दिन तक बुखार रहने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां हुई जांच में पता चला कि संक्रमण उसके हार्ट तक पहुंच चुका है और उसकी हालत हार्ट फेलियर तक पहुंच गई थी.
आखिर कच्चे दूध से हार्ट तक संक्रमण कैसे पहुंचा?

डॉक्टर शालिनी के मुताबिक, इस युवक को Brucellosis नाम का बैक्टीरियल इंफेक्शन हुआ था. यह इंफेक्शन संक्रमित जानवरों या उनसे मिलने वाले कुछ उत्पादों से इंसानों तक पहुंच सकता है. कच्चा यानी बिना पाश्चराइज किया हुआ दूध भी इसका एक संभावित सोर्स है.
ज्यादातर मामलों में इसका इलाज संभव है, लेकिन कुछ गंभीर और दुर्लभ मामलों में यह बैक्टीरिया हार्ट के अंदरूनी हिस्से या वाल्व तक पहुंच सकता है.
इससे infective endocarditis हो सकता है. अगर स्थिति गंभीर हो जाए तो हार्ट की काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और हार्ट फेलियर तक की नौबत आ सकती है.
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लंबे समय तक एंटासिड लेने की बात क्यों सामने आई?
इस केस में एक और बात सामने आई। युवक को अक्सर एसिडिटी की शिकायत रहती थी और वह लंबे समय से बिना डॉक्टर की सलाह के एंटासिड ले रहा था.
डॉक्टर ने बताया कि इंसान के पेट का एसिड सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, बल्कि यह शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था भी है. पेट का एसिड कम करने वाली दवाओं का गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल कुछ तरह के संक्रमणों के जोखिम को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एंटासिड लेने की वजह से ही युवक को यह संक्रमण हुआ. इस केस में कच्चे दूध का सेवन और दूसरी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण थीं.
तो क्या कच्चा दूध पीना हमेशा खतरनाक है? ऐसा नहीं है कि कच्चा दूध पीने वाले हर व्यक्ति को गंभीर बीमारी हो जाएगी, लेकिन परेशानी यह है कि कच्चे दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को हम देखकर या स्वाद से पहचान नहीं सकते. इसीलिए दूध को पाश्चराइज करना या घर पर अच्छी तरह उबालकर पीना संक्रमण के खतरे को कम करने का आसान तरीका है.
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