Saudi Arab Crude Oil: दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरामको ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की कीमत में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है. अगस्त में डिलीवरी होने वाले अरब लाइट क्रूड का दाम 11 डॉलर प्रति बैरल घटा दिया गया है. अब यह तेल ओमान-दुबई बेंचमार्क से भी 1.50 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलेगा.
यह सिर्फ सऊदी अरब का फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है.
सऊदी ने तेल इतना सस्ता क्यों किया?
इसकी सबसे बड़ी वजह है बाजार में बढ़ती सप्लाई और घटती मांग. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई सामान्य होने लगी है. इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया.
दूसरी तरफ चीन जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है पिछले दो महीनों से सऊदी से कम तेल खरीद रहा है क्योंकि उसे रूस और ईरान का तेल सस्ता मिल रहा है. ऐसे में ग्राहकों को वापस आकर्षित करने के लिए सऊदी ने कीमतें घटा दीं. इसके साथ ही OPEC प्लस ने भी लगातार पांचवें महीने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है यानी बाजार में तेल और ज्यादा आएगा.
भारत के लिए यह खबर क्यों अहम है?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और इसमें खाड़ी देशों में खासकर सऊदी अरब की बड़ी हिस्सेदारी है. अगर सऊदी से मिलने वाला तेल सस्ता होगा तो भारत का तेल आयात बिल कम हो सकता है. इसका सीधा फायदा सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को मिलेगा, क्योंकि उन्हें कच्चा तेल पहले के मुकाबले कम कीमत पर मिलेगा.
क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय तक इसी तरह नीचे बनी रहती हैं तो पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने की संभावना बन सकती है. हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां और सरकार ही लेंगी. कंपनियां पहले अपने पुराने नुकसान की भरपाई भी करना चाह सकती हैं.
हवाई सफर और एलपीजी पर भी असर
सस्ता कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता. अगर क्रूड सस्ता रहता है तो एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी राहत मिल सकती है. इससे आगे चलकर हवाई किरायों पर भी असर पड़ सकता है.
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इसके अलावा एलपीजी आयात की लागत भी कम हो सकती है. कच्चा तेल सस्ता रहने से महंगाई पर दबाव भी घट सकता है क्योंकि तेल की कीमतों का असर कई जरूरी चीजों की लागत पर पड़ता है.
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल सऊदी ने सिर्फ अपने आधिकारिक बिक्री मूल्य (OSP) में कटौती की है. भारत को वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में ब्रेंट और दुबई क्रूड की कीमतें किस स्तर पर रहती हैं. अगर होर्मुज से सप्लाई सामान्य बनी रहती है और ओपेक प्लस उत्पादन बढ़ाता रहता है तो कच्चा तेल और सस्ता हो सकता है. लेकिन अगर पश्चिम एशिया में फिर तनाव बढ़ा तो कीमतें दोबारा ऊपर जा सकती हैं.
फिलहाल इतना तय है कि सऊदी की इस बड़ी कटौती से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.


