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Capf:सीएपीएफ इंस्पेक्टरों की बड़ी जीत, योग्य कार्मिकों को अब 5400 का ‘ग्रेड पे’, अदालत में आने की जरुरत नहीं – Capf Inspectors Major Victory Eligible Personnel Will Get Grade Pay Of 5400 No Need To Approach Court

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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कार्यरत उन हजारों इंस्पेक्टरों को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है, जो नियमानुसार 5400 रुपये के ‘ग्रेड-पे’ आने के हकदार हैं। फिलहाल ये इंस्पेक्टर 48 सौ रुपये के ‘ग्रेड-पे’ में हैं। केंद्र सरकार में बाकी सभी महकमों के कार्मिकों को इस गैर-कार्यात्मक उन्नयन (एनएफयू) का फायदा मिल रहा है, लेकिन सीएपीएफ में इसे लागू नहीं किया गया। नतीजा, इसके लिए इंस्पेक्टरों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब एक बार निर्णय हो गया है तो उस जैसे बाकी मामलों में भी वही फैसला लागू होगा। जो फायदा किसी एक कार्मिक को मिला है तो वह बाकी को भी मिलना चाहिए। 

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने याचिकाकर्ता नवीन कुमार जो असम राइफल में सूबेदार के पद पर कार्यरत है, के मामले में यह फैसला दिया है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन ने गैर-कार्यात्मक उन्नयन (एनएफयू) के इस फैसले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार बनाम भारत सरकार एवं अन्य, रिट पिटीशन संख्या 690/2022 को आधार बनाया है। असम राइफल का सूबेदार, बाकी केंद्रीय बलों में इंस्पेक्टर रैंक के बराबर होता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता नवीन कुमार भी 5400 रुपये के ग्रेड पे का अधिकारी है। सुशील कुमार की तरह नवीन कुमार उक्त वित्तीय फायदा लेने के योग्य है। 

हाईकोर्ट ने कहा, जब एक बार निर्णय हो गया है तो एक जैसे सभी मामलों में याचिकाकर्ताओं को अलग-अलग कोर्ट में आने के लिए मजबूर करना ठीक नहीं है। जो फायदा एक को मिला है, वह सभी को मिलना चाहिए। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि ये फायदे कानून के अनुसार सभी योग्य कार्मिकों को दिए जाएं। सरकार को इन्हें खुद ही लागू कर देना चाहिए। डिवीजन बैंच ने कहा है, अगर ऐसा कोई मामला, जिसमें याचिकाकर्ता किसी फायदे को लेने का अधिकारी है और सरकार उसे न देकर कोर्ट में आने को मजबूर करती है तो उस स्थिति में अदालत सख्त कदम उठा सकती है। बैंच ने नवीन कुमार को चार सप्ताह में  5400 रुपये का ग्रेड पे देने का आदेश दिया है। 

क्या है 5400 रुपये ‘ग्रेड पे’ का मामला … 

सीएपीएफ में वित्त मंत्रालय का 2008 में जारी हुआ एक कार्यालय ज्ञापन लागू नहीं किया जा रहा। यह केंद्र सरकार के बाकी विभागों में तो लागू होता है, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों को इससे बाहर रखा जा रहा है। इस कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ‘ग्रेड पे’ है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं तो उनका ‘ग्रेड पे’ 54 सौ रुपये हो जाएगा। केंद्रीय बलों में इस नियम को लागू कराने के लिए निरीक्षकों को अदालत की शरण लेनी पड़ रही है। सबसे पहले आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने यह लड़ाई जीती थी। अब उन्हें 5400 रुपये का ग्रेड पे और सहायक कमांडेंट का पद मिल गया है। हालांकि सुशील कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने हक की लड़ाई जीती है। उनके मामले में सरकार, सुप्रीम में एलएलपी में गई थी। जब एसएलपी खारिज हुई तो सरकार, रिव्यू पिटीशन में चली गई। दोनों ही मामलों में सरकार को हार का सामना करना पड़ा। 

सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों को जीत मिली, फायदा नहीं …  

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ के ऐसे सैंकड़ों इंस्पेक्टर, जो लंबे समय से अदालत में अपने हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं, को फरवरी में दोहरी जीत मिली थी। इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह, सुरेश कुमार यादव व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीएफ/सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जिन इंस्पेक्टरों का 48 सौ रुपये का ‘ग्रेड पे’ है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 54 सौ रुपये का ‘ग्रेड पे’ मिलेगा। इसके खिलाफ सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। दूसरा, सीआरपीएफ इंस्पेक्टर सुरेश यादव व अन्य 71 इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाई थी। इसमें कहा गया था कि सीआरपीएफ, हाईकोर्ट के फैसले को लागू नहीं कर रही है। इस केस में हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ/सरकार को नोटिस जारी किया था। हालांकि अभी तक इंस्पेक्टरों को यह फायदा नहीं मिल सका है। 

बीएसएफ इंस्पेक्टरों को नहीं मिला फायदा … 

‘सीएपीएफ’ में जवान/अधिकारी, जब भी अपनी पदोन्नति, भत्ते एवं दूसरे आर्थिक फायदे, जिनमें गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) भी शामिल है, को लेकर अदालत से लड़ाई जीतते हैं तो उस मामले में कोई न कोई बाधा खड़ी कर दी जाती है। 48 सौ रुपये के ‘ग्रेड पे’ में चार साल की सेवा पूरी करने वाले इंस्पेक्टरों को 54 सौ का ग्रेड पे देना, अदालती लड़ाई जीतने के बावजूद याचिकाकर्ताओं को यह फायदा नहीं मिल सका। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट से अपने हक की लड़ाई जीतने के बाद बल मुख्यालय ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में ऐसे तर्क दिए कि इंस्पेक्टर हैरान रह गए। कहा गया कि केंद्र सरकार के दूसरे विभागों में समान वेतनमान वाले कर्मियों को जो आर्थिक फायदे मिलते हैं, वे बीएसएफ में इंस्पेक्टरों ‘जीडी’ के लिए नहीं हैं। 

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