
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल पर बड़ा एक्शन लिया है. आरबीआई ने मंत्री पाटिल समेत लातूर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक यानी DCCB के सात अन्य डायरेक्टर्स को पद से हटाने का आदेश दिया है. यह सभी लोग दस साल से ज्यादा वक्त से पदों पर बने हुए थे.
सभी को पद से हटाने वाला आदेश आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक कपिल गोस्वामी ने जारी किया है. इससे पहले राज्य सहकारिता विभाग के उप सचिव सुधीर अमृते ने पुणे के सहकारिता आयुक्त को पत्र लिखकर जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के उन निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिन्होंने अपने पद पर 10 साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा कर लिया था. केंद्रीय बैंक का यह आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ की ओर से बैंक सदस्य सतीश शेषराव जाधव की ओर से दायर याचिका के जवाब में पारित निर्देशों के बाद आया है.
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आरबीआई के आदेश को चुनौती नहीं दूंगा- पाटील
बाबासाहेब पाटिल राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP के नेता हैं. हालांकि बाकी सात डायरेक्टर्स ने पहले ही इस्तीफा सौंप दिया था, जबकि मंत्री पाटिल ने फैसले को अदालत में चुनौती न देने की बात कहते हुए इस नियम को पिछली तारीख से लागू किए जाने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया, ”मैं आरबीआई के आदेश को चुनौती नहीं दूंगा, लेकिन 10 साल वाला नियम साल 2021 में लागू हुआ था और यह जांच की जानी चाहिए कि क्या इसे उस साल से पहले की नियुक्तियों पर लागू किया जा सकता है?”
RBI ने क्यों लिया यह एक्शन?
RBI के बैंकिंग विनियमन कानून 1949 के तहत कोई भी व्यक्ति सहकारी बैंक में लगातार दस साल से ज्यादा वक्त तक डायरेक्टर के पद पर नहीं रह सकता. इस कानून को 2025 में संशोधित किया गया था, जिसमें नियम बनाया गया था कि ला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी/केंद्रीय सहकारी बैंकों) के निदेशकों का अधिकतम कार्यकाल दस साल निर्धारित है.
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