दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों के साथ लगे शपथ-पत्रों ने दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति का पूरा ब्योरा सामने रख दिया है। आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह, भाजपा के आशुतोष तिवारी से संपत्ति के मामले में काफी आगे हैं।
दतिया राजघराने के मुखिया और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति करीब 20.08 करोड़ रुपये बताई है। इसमें साढ़े तीन करोड़ से अधिक की कृषि भूमि और ढाई करोड़ की गैर-कृषि भूमि शामिल है। इसके अलावा उनके पास शहर में कई कमर्शियल बिल्डिंग्स भी हैं।
आशुतोष तिवारी ने अपनी संपत्ति 1.79 करोड़ रुपये घोषित की
नकदी के मामले में उनके पास 1.80 लाख रुपए हैं। उन पर बैंकों का 5.63 लाख रुपए का कर्ज भी दर्ज है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने अपनी संपत्ति 1.79 करोड़ रुपए घोषित की है। यह घनश्याम सिंह की संपत्ति से लगभग 11 गुना कम है। उनके पास 1 लाख 54 हजार 500 रुपये नकद हैं और बैंकों का 11.83 लाख रुपये का कर्ज है।
लेकिन यहां ट्विस्ट आता है। पत्नी की संपत्ति में बाजी आशुतोष ने मार ली। उनकी पत्नी कल्पना तिवारी के नाम करीब 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इसमें अकेले 1.31 करोड़ रुपये की कृषि भूमि शामिल है। जबकि घनश्याम सिंह की पत्नी के पास 84.17 लाख रुपये की संपत्ति है। कीमती धातु के मामले में भी दोनों प्रत्याशियों की पत्नियां अपने पतियों से आगे निकलीं। घनश्याम सिंह के पास 240 ग्राम सोना है, जबकि उनकी पत्नी के पास 580 ग्राम सोना है।
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जिले में कुल 32 नामांकन दाखिल हुए
इधर आशुतोष तिवारी के पास 80 ग्राम सोना है और उनकी पत्नी कल्पना के पास 312 ग्राम सोना दर्ज है। हलफनामे के अनुसार घनश्याम सिंह के खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने खुद को आपराधिक रिकॉर्ड से मुक्त बताया है। सोमवार को नामांकन की अंतिम तारीख थी। मंगलवार 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। जिले में कुल 32 नामांकन दाखिल हुए हैं। इनमें से कई प्रत्याशियों ने एक से अधिक पर्चे भरे हैं। आशुतोष तिवारी ने 2, घनश्याम सिंह ने 3 और दामोदर ने 2 नामांकन जमा किए हैं।
नाम वापसी की आखिरी तारीख 16 जुलाई
नाम वापसी की आखिरी तारीख 16 जुलाई है। इसके बाद मैदान में बचे उम्मीदवारों के नाम फाइनल होंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया में यह चुनाव विकास बनाम विरासत के साथ-साथ अमीर बनाम आम की लड़ाई भी बन सकता है। एक तरफ राजघराने से ताल्लुक रखने वाले करोड़पति उम्मीदवार हैं, तो दूसरी तरफ अपेक्षाकृत कम संपत्ति वाले लेकिन संगठन से जुड़े चेहरे।


