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Birthday Special: कम फिल्मों में छोड़ी गहरी छाप, हर किरदार से बनाई अलग पहचान, ऐसा रहा बबीता कपूर का करियर

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हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की एक्ट्रेस बबीता का नाम उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने कम समय में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. उन्होंने खुद को कभी एक जैसे किरदारों तक सीमित नहीं रखा. रोमांस हो, पारिवारिक कहानी हो या कॉमेडी किरदार, बबीता हर तरह के रोल में नजर आईं. यही वजह है कि उनका छोटा सा करियर भी काफी यादगार बन गया. 

छोटी उम्र में शुरू हुआ करियर
बबीता का जन्म 20 अप्रैल 1947 को कराची में हुआ था. उनके पिता हरि शिवदासानी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, इसलिए उन्हें बचपन से ही अभिनय का माहौल मिला. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया. साल 1966 में आई फिल्म ‘दस लाख’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उनका किरदार रीता एक साधारण, लेकिन भावनात्मक लड़की का था, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा.

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इसके बाद, बबीता को पहचान फिल्म ‘राज’ से मिली, जिसमें उनके साथ राजेश खन्ना थे. इस फिल्म में उन्होंने एक रहस्यमयी किरदार निभाया. भले ही फिल्म बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन बबीता की एक्टिंग को सराहा गया और उन्हें इंडस्ट्री में आगे काम मिलने लगा.

इस फिल्म में बनाया स्टार
उनके करियर का एक बड़ा मोड़ फिल्म ‘फर्ज’ से आया, जिसमें उन्होंने एक रोमांटिक लड़की का रोल निभाया. यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई और बबीता को स्टार बना दिया. इसके बाद उन्होंने ‘हसीना मान जाएगी’ में एक मजेदार किरदार में नजर आई और अपनी कॉमिक टाइमिंग भी साबित की. वहीं, ‘किस्मत’ में उनका किरदार ज्यादा गंभीर था.

साल 1969 में आई फिल्म ‘एक श्रीमान एक श्रीमती’ में उन्होंने एक मॉडर्न और आत्मविश्वासी लड़की का किरदार निभाया, जो उस दौर के हिसाब से काफी नया और अलग था. इसी तरह, ‘तुमसे अच्छा कौन है’ और ‘अनजाना’ जैसी फिल्मों में उन्होंने पारिवारिक और रोमांटिक किरदारों को खूबसूरती से निभाया.

ऐसे शुरू हुई लव स्टोरी
उनकी जिंदगी का अहम पड़ाव साल 1971 में आया, जब उन्होंने रणधीर कपूर के साथ फिल्म ‘कल आज और कल’ में काम किया. इस फिल्म में उन्होंने एक मॉर्डन युवती का किरदार निभाया. इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में उन्होंने शादी कर ली.

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शादी के बाद बबीता ने फिल्मों से दूरी बना ली. कपूर परिवार की परंपरा के कारण उन्होंने अपने करियर को छोड़ दिया और परिवार को प्राथमिकता दी. उन्होंने अपनी बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान की परवरिश पर पूरा ध्यान दिया और उन्हें सफल एक्ट्रेस बनने में मदद की.



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