बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर महागठबंधन में सियासी घमासान शुरू हो गया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने राज्यसभा चुनाव में मदद के बदले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से एक एमएलसी सीट की मांग कर दी है।


सुनील सिंह पर भी सवाल ?
विधान परिषद की 9 सीटों और एक उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान होना है। संख्या बल के लिहाज से विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट आती दिख रही है। ऐसे में एआईएमआईएम की इस दावेदारी ने तेजस्वी यादव के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि इस सीट पर लालू यादव के बेहद करीबी और तेजस्वी के मुंहबोले मामा सुनील कुमार सिंह को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
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एआईएमआईएम ने याद दिलाया राज्यसभा चुनाव का वादा
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने साफ तौर पर कहा कि पिछले राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने महागठबंधन का समर्थन किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि भविष्य में वह एआईएमआईएम के हितों का ख्याल रखेंगे। विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि अब समय आ गया है कि तेजस्वी अपना वादा पूरा करें। हमारे पास अकेले दम पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। अगर राजद भविष्य में हमारा सहयोग चाहती है, तो उसे यह सीट हमें देनी होगी।
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राजद के दो और कांग्रेस के एक एमएससी का कार्यकाल समाप्त
बिहार विधान परिषद में विधानसभा कोटे की 9 सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। जिन 9 सीटों पर चुनाव होना है, उनके सदस्यों का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। वर्तमान में इनमें से 6 तो एनडीए की है, बाकी तीन विपक्ष की सीटें हैं। राजद से एमएलसी सुनील सिंह और मोहम्मद फारूक का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जबकि कांग्रेस के समीर कुमार सिंह रिटायर हो रहे हैं।
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तेज प्रताप या फिर रोहिणी, किस पर लालू प्रसाद खेलेंगे गेम ?
9 एमएलसी सीटों पर एक साथ चुनाव होना है, तो विधानसभा में संख्याबल के अनुसार 8 सीट पर एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है। वहीं, एक सीट पर विपक्ष का कब्जा तय माना जा रहा है। नौवीं सीट पर विपक्ष से कौन उम्मीदवार होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि, विपक्ष में सर्वाधिक विधायकों वाली राजद का दावा ज्यादा मजबूत है। इस बीच दो तरह की चर्चा तेज हुई थी। पहली चर्चा यह थी कि इसके लिए तेज प्रताप यादव को तैयार किया जाना था लेकिन तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं अपनी पार्टी से किसी को भी भेज सकता हूं, लेकिन राजद से नहीं। बताया जाता है कि नेता प्रतिपक्ष तेज प्रताप यादव की पार्टी के लिए तैयार नहीं थे , इसलिए बात बनने से पहले ही बिगड़ गई।
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रोहिणी आचार्या की भी उठी चर्चाएं
वहीं दूसरी चर्चा रोहिणी आचार्या की भी उठी। हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर आकर खुद उन्होंने इसकी उम्मीदवारी के लिए खुद को अलग रखने की घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ लोग साजिश कर के ऐसी खबर प्रकाशित करवाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि मैं इन सारी जिम्मेदारियों से पुर्णतः मुक्त हूं। हालांकि 2 जून को राजद कार्यालय और लालू प्रसाद यादव की एआई जेनरेटेड तस्वीर वाली और दूसरी उनके जन्मदिन की बधाई वाली तस्वीर लगी थी।
किसका कार्यकाल हो रहा है खत्म?
विधानसभा कोटे की जिन 9 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से 6 फिलहाल एनडीए और 3 विपक्ष के पास हैं। इस महीने रिटायर होने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस से समीर कुमार सिंह, राजद के सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारूक शामिल हैं।
तेजस्वी यादव धर्मसंकट में
अगर लालू परिवार से कोई नहीं लड़ता है, तो सुनील सिंह का टिकट तय माना जा रहा था। मगर अब ओवैसी की पार्टी के अड़ जाने से तेजस्वी यादव धर्मसंकट में हैं। उनके सामने चुनौती है कि वह अपने मामा सुनील सिंह को मैदान में उतारे या फिर राज्यसभा चुनाव के अहसान का बदला चुकाते हुए एआईएमआईएम को सीट सौंपें। नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है, तब तक राजद खेमे में यह खींचतान जारी रहने के आसार हैं।
