बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने वकीलों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल नैतिकता के नियमों को लेकर सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत वकीलों के कोर्टरूम या अदालत परिसर में सोशल मीडिया के लिए रील बनाने पर रोक लगाई गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बीसीआई ने सभी राज्य बार काउंसिल को वकीलों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और डिजिटल आचरण से जुड़े नए नियम तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है। 17 जुलाई को जारी पत्र में बीसीआई ने सभी राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और सचिवों से कहा कि इन दिशा-निर्देशों को वकीलों, लॉ फर्मों, बार एसोसिएशनों और कानूनी संस्थानों तक व्यापक रूप से पहुंचाया जाए, ताकि इनका सख्ती से पालन हो।
नए नियम में क्या?
नए नियमों के अनुसार, वकीलों को सोशल मीडिया पर पेशेवर आचरण बनाए रखना होगा। अदालतों के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक या मानहानिकारक पोस्ट करने पर रोक रहेगी। साथ ही, मुवक्किल की गोपनीय जानकारी और अदालत की गोपनीय कार्यवाही सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। बार काउंसिल ने वकीलों से डिजिटल माध्यम में भी अदालत की गरिमा बनाए रखने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार सामग्री का अनैतिक उपयोग न करने और सभी ऑनलाइन संवाद को पेशे की नैतिक मर्यादा के अनुरूप रखने को कहा है।
वकीलों को देना होगा लिखित घोषणापत्र
बीसीआई ने राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों को अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया और नोटिस बोर्ड पर जारी करें। साथ ही वेबिनार, कार्यशाला और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वकीलों को नए नियमों की जानकारी दें। नामांकन या नवीनीकरण के समय वकीलों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करने का लिखित घोषणा-पत्र भी लिया जाएगा।
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सोशल मीडिया एथिक्स नोडल अधिकारी करेंगे निगरानी
कानूनी शिक्षा से जुड़े छोटे वीडियो, रील, पॉडकॉस्ट क्लिप या पोस्ट साझा करने की इजाजत रहेगी, बशर्ते वे तथ्यात्मक, संतुलित, गोपनीयता का सामना करने वाले और भ्रामक दावे करने वाले न हों। बीसीआई ने सभी बार काउंसिल और बार एसोसिएशन को सोशल मीडिया एथिक्स नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, जो डिजिटल आचार संहिता से जुड़े मामलों और शिकायतों का निगरानी करेगा।


