'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- पारिजात, जिसका अर्थ है- समुद्र मंथन के समय निकला हुआ एक देववृक्ष जो स्वर्गलोक में इंद्र के नंदनकानन में है, हरसिंगार। प्रस्तुत है रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की कविता- आओ लिखें दीप
साथ सारे छोड़ देंगे मोड़ पर
एक तुम हो साथ यह विश्वास है।
हम अँधेरों से लड़ें, आगे बढ़ें
होगा उजेरा आज भी आस है।
आओ लिखें दीप नभ के भाल पर
अधर हँसे कि झरें पारिजात भी।
सुरभि में नहाकर हो पुलकित धरा
ओस भीगे सभी पुलकित पात भी।
बुहारता उदासियों की धूल को
थिरकता गली -गली में उजास है।
हम अँधेरों से लड़ें, आगे बढ़ें
होगा उजेरा आज भी आस है ।
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
1 hour ago


