'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अबोध, जिसका अर्थ है- अज्ञान, मूर्खता, अनजान। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- एकांत में यशोधरा
आओ हो वनवासी!
अब गृह भार नहीं सह सकती
देव तुम्हारी दासी!!
राहुल पल कर जैसे तैसे,
करने लगा प्रश्न कुछ ऐसे,
मैं अबोध उत्तर दूँ कैसे?
वह मेरा विश्वासी,
आओ हो वनवासी!
उसे बताऊँ क्या तुम आओ,
मुक्ति-युक्ति मुझसे सुन जाओ--
जन्म-मूल मातृत्व मिटाओ,
मिटे मरण-चौरासी!
आओ हो वनवासी!
सहे आज यह मान तितिक्षा,
क्षमा करो मेरी यह शिक्षा;
हमीं गृहस्थ जनों की भिक्षा,
पालेगी सन्यासी!
आओ हो वनवासी!
मुझको सोती छोड़ गए हो,
पीठ फेर मुँह मोड़ गए हो,
तुम्हीं जोड़कर तोड़ गए हो,
साधु विराग-विलासी!
आओ हो वनवासी!
यह भी पढ़ें
CSK को मिल गया आयुष म्हात्रे का रिप्लेसमेंट, IPL 2026 के बीच चेन्नई में आया MI का पुराना खिलाड़ीजल में शतदल तुल्य सरसते
तुम घर रहते, हम न तरसते,
देखो, दो-दो मेघ बरसते
मैं प्यासी की प्यासी!
आओ हो वनवासी!
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
5 घंटे पहले

