Weather Change Joint Pain: मौसम बदलते ही जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है. शरीर के कई जोड़ों में दर्द होने लगता है. वहीं, सर्दियों में कुछ लोगों को जुकाम हो जाता है, कुछ लोगों की आंखों से पानी आने लगता है. साथ ही कुछ लोगों को बोलने में भी दिक्कत होने लगती है. इसके साथ ही कई लोगों को एलर्जी भी होने लगती है. डॉ. शुभम अग्रवाल के अनुसार, यह सभी कॉमन लक्षण हैं. मौसम बदलने के साथ जोड़ों में दर्द होना बहुत ही स्वाभाविक है.
मौसम बदलने पर शरीर में होते हैं बदलाव

डॉ. शुभम अग्रवाल के मुताबिक, जो हमारे बाहरी मसल्स होते हैं, वो मसल्स बाहर के तापमान के हिसाब से जकड़ जाती हैं, लेकिन अंदर से हमारा शरीर 37 डिग्री तापमान को बनाए रखता है. इस असंतुलन की वजह से सारी मसल्स कई बार जकड़ जाती हैं. इसलिए लोगों को बिना वजह दर्द शुरू हो जाता है. जब मसल्स जकड़ जाती हैं, तो पुराना हड्डियों का दर्द, जोड़ों का दर्द, गठिया का दर्द या फिर पुरानी कोई चोट लगी हुई हो, तो उसमें दर्द होना स्वाभाविक है. यह दर्द इसलिए होता है क्योंकि शरीर के तापमान में अंतर हो जाता है. दूसरा, खून की नसें सिकुड़ जाती हैं. खून की नसें सिकुड़ने की वजह से दर्द बढ़ जाता है.
एक्सरसाइज से मिल सकती है राहत
डॉ. शुभम अग्रवाल के अनुसार, दर्द से राहत के लिए हमें एक्सरसाइज करनी चाहिए. एक्सरसाइज करने से हमारी मसल्स एक्टिव रहेंगी. मसल्स के अंदर और बाहर के तापमान से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. अगर हम एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो बाहर के तापमान की वजह से मसल्स में दर्द और जकड़न हो सकती है. अगर हम रेगुलर एक्सरसाइज करेंगे, बॉडी को हाइड्रेटेड रखेंगे और गर्म कपड़े पहनेंगे, साथ ही पर्याप्त पानी पीएंगे, तो शरीर में मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और इस तरह का दर्द कम हो सकता है. अगर किसी को अर्थराइटिस या गठिया है, या किसी तरह की जॉइंट से जुड़ी कोई बीमारी है, तो हो सकता है कि उसका उपचार लेना पड़े. यानी डॉक्टर के पास जाकर उसका ट्रीटमेंट लेना पड़े.
बारिश और गर्मी में भी हो सकता है दर्द

मौसम में जो परिवर्तन होते हैं, वे सिर्फ सर्दियों के लिए ही वैलिड नहीं हैं. ये चीजें जब हम सर्दियों से बारिश में प्रवेश करते हैं या बारिश से गर्मी में प्रवेश करते हैं, तो भी होती हैं. ज्यादातर लोगों को बारिश के समय ही यह समस्या सामने आती है. बरसात में भी यह सब होना स्वाभाविक ही है. मौसम परिवर्तन के दौरान बॉडी में जहां भी पुराने इम्प्लांट लगे हुए हैं या पैर में रॉड डाली हुई है, या जहां भी चोट की साइट है, वहां पर भी दर्द हो सकता है.
गर्म सिकाई और फिजियोथेरेपी से मिल सकती है राहत
इसका इलाज यह है कि हल्के गर्म पानी की सिकाई की जा सकती है. डॉक्टर से मिलें और अगर जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाई दे रहा है, तो उसे लें. साथ ही फिजियोथेरेपी की सलाह ले सकते हैं. या फिर जहां दर्द हो रहा है, उस पार्टिकुलर पार्ट के लिए एक्सरसाइज भी डॉक्टर सुझा सकते हैं. ऐसे यह सारा दर्द कम हो सकता है.
गठिया की दवा अचानक बंद न करें
वहीं, अगर बहुत पुराना गठिया है और आप उसकी दवाई नहीं ले रहे हैं और मौसम बदलने से आपको दर्द हो रहा है, तो उसका ट्रीटमेंट लंबे समय तक चलता है. गठिया की दवाइयां एकदम से बंद नहीं की जा सकती हैं. मौसम बदलाव में अगर दर्द आ रहा है, तो यह एक वार्निंग साइन है कि आपको गठिया का ट्रीटमेंट रेगुलर बेसिस पर लेना है. दर्द का मतलब ही है कि गठिया में प्रॉपर ट्रीटमेंट नहीं लिया जा रहा है. इसलिए डॉक्टर से मिलना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि कौन-से इलाज की जरूरत है और क्या नहीं करना है.
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