प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सेवा संकल्प यात्रा के प्रतिभागियों से बातचीत की। सेवा यात्री 10 समूहों में वड़नगर से वाराणसी तक साइकिल यात्रा कर रहे हैं। इसके साथ ही बातचीत में झाबुआ जिले के एक गांव में ‘मोदी फालिया’ नाम रखे जाने और युवाओं के समर्थन का भी जिक्र हुआ।

पुरानी कहावत का जिक्र कर क्या बोले पीएम?
प्रतिभागियों से बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक पुरानी कहावत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘एक पुरानी कहावत है कि जब कोई यात्रा से लौटता है और आप उन्हें प्रणाम करते हैं, तो उस यात्रा से मिले आध्यात्मिक पुण्य का आधा हिस्सा प्रणाम करने वाले व्यक्ति को मिल जाता है। इसलिए आज, इन सभी ‘सेवा यात्रियों’ को नमन करके, मैं भी उस पुण्य का आधा हिस्सा ले रहा हूं।’
‘सेवा हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए’
पीएम मोदी ने हिस्सा लेने वालों से अपना ध्यान रखने को कहा और इस बात पर जोर दिया कि सेवा ही मुख्य मकसद होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सेवा हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए। हमें सिर्फ उपदेश देकर नहीं, बल्कि खुद सेवा करके सेवा का संदेश देना चाहिए। हम अपने कामों से सेवा का संदेश देंगे, सिर्फ बातों से नहीं।’
उन्होंने कहा कि हिस्सा लेने वालों का व्यवहार लोगों को यह दिखाना चाहिए कि चाहे कितनी भी राजनीतिक ताकत क्यों न मिल जाए, रास्ता सेवा का ही होना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारा व्यवहार लोगों को यह दिखाना चाहिए कि चाहे हमें कितनी भी बड़ी राजनीतिक ताकत क्यों न मिले, हमारा रास्ता सेवा का ही रहता है।’
यात्रियों से पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, ‘हम सेवा के इस रास्ते से कभी नहीं भटकेंगे। हम चाहे कितनी भी बड़ी ऊंचाइयां हासिल कर लें, हम हमेशा ‘सेवा परमो धर्म’ (सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है) के सिद्धांत का पालन करते हुए आगे बढ़ेंगे। कुल 35,500 किलोमीटर की दूरी 20 टीमें तय करेंगी, जिनका एक ही संकल्प होगा – ‘सेवा’।’
क्या है सेवा संकल्प यात्रा?
यह पीएम मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को उजागर करने वाले बड़े सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। इसमें शामिल लोग कस्बों, जिलों, तालुकों और गांवों की यात्रा कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सेवा और लोगों की भागीदारी वाली गतिविधियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
बता दें कि 17 सितंबर से 7 अक्तूबर तक, ये टीमें वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर तक का सफर करेंगी। उन्होंने एक ऐसी यात्रा शुरू की है जो सिर्फ एक मोटरसाइकिल यात्रा से कहीं ज्यादा है। वे कस्बों, जिलों, तालुकों और गांवों से गुजरते हुए सेवा की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचा रहे हैं। यह पीएम मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को उजागर करने वाले बड़े सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है।

