अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के दौरान बनाया जा रहा परमाणु रिएक्टर इस तरह तैयार किया गया था कि उससे संभावित रूप से परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तैयार की जा सके।

आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि असद के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान बन रहे रिएक्टर की बनावट और तकनीकी विशेषताएं विखंडनीय सामग्री के उत्पादन के लिए बहुत प्रभावी थीं। इस सामग्री का सीधे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता था।
सीरियाई परमाणु सामग्री को लेकर क्या बोले आईएईए प्रमुख?
राफेल ग्रॉसी ने वियना में आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की नियमित बैठक के पहले दिन पत्रकारों से कहा, “बेशक, इसकी कभी घोषणा नहीं की गई थी, हमेशा इससे इनकार किया गया। इसलिए, इरादों का आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह परमाणु प्रसार से जुड़ी एक बेहद गंभीर चिंता थी और इस पर काम करना कठिन रहा है।”
माना जाता है कि असद के शासन के दौरान सीरिया ने एक व्यापक और अघोषित परमाणु कार्यक्रम चलाया था। इसमें पूर्वी दीर अल-जोर प्रांत में उत्तर कोरिया की मदद से बनाया गया परमाणु रिएक्टर भी शामिल था। असद को सत्ता से हटाए जाने के बाद सीरिया की नई सरकार ने आईएईए के निरीक्षकों को संदिग्ध पुराने परमाणु स्थलों तक पहुंच देने पर सहमति जताई।
अगस्त में सीरिया के दौरे के दौरान आईएईए के निरीक्षकों ने पुष्टि की कि वहां मिली “शीतलन व्यवस्था परमाणु रिएक्टर की व्यवस्था के अनुरूप है।” ग्रॉसी और वरिष्ठ निरीक्षकों की एक टीम ने देश में पहले घोषित नहीं किए गए एक अन्य स्थल का भी दौरा किया।
छिपी परमाणु सामग्री तक पहुंचने के लिए क्यों तोड़नी पड़ीं दीवारें?
सीरिया ने 17 जुलाई को एक पत्र के जरिए एजेंसी को इस स्थल के बारे में जानकारी दी थी। उसने आईएईए को “स्थल और वहां संभावित रूप से मिलने वाली किसी भी परमाणु सामग्री के निरीक्षण और सत्यापन में सीरियाई अधिकारियों के साथ सहयोग करने” के लिए आमंत्रित किया था। आईएईए की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, जो पिछले मंगलवार को सदस्य देशों के बीच प्रसारित हुई और एसोसिएटेड प्रेस ने देखी, इस नए स्थल पर “ईंधन छड़ों के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम धातु, जिस पर बाहरी आवरण लगा था” मिली।
एजेंसी ने सामग्री का सत्यापन किया और करीब 73 टन प्राकृतिक यूरेनियम धातु की मौजूदगी की पुष्टि की। ग्रॉसी ने बताया कि अगस्त में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को छिपाकर रखी गई परमाणु सामग्री तक पहुंचने के लिए “दीवारें तोड़नी पड़ीं” और “बहुत मुश्किल और संकरे रास्तों” से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्थल पर हर तरफ बक्से बिखरे हुए थे। ग्रॉसी ने कहा, “महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सामग्री अब आईएईए की निगरानी व्यवस्था के तहत है।” उन्होंने बताया कि एजेंसी के निरीक्षक वहां कैमरे लगाने में भी सफल रहे हैं।
क्या सीरिया में ही रहेगी परमाणु सामग्री?
यह पूछे जाने पर कि परमाणु सामग्री सीरिया में ही रहेगी या उसे कहीं और ले जाया जाएगा, ग्रॉसी ने कहा कि यह फैसला “सीरियाई सरकार को करना होगा।” उन्होंने कहा, “हम उनसे यह करने या वह करने के लिए नहीं कह रहे हैं। हमारे लिए महत्वपूर्ण यह है कि हमें हर समय पता रहे कि यह सामग्री कहां है, आखिरी ग्राम तक।”
वॉशिंगटन स्थित न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव में परमाणु सामग्री सुरक्षा की निदेशक लोगान मिंट्ज ने कहा कि प्राकृतिक यूरेनियम धातु का सीधे परमाणु हथियार में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसे किसी गुप्त हथियार कार्यक्रम में भेजा जा सकता है, जहां आगे की प्रक्रिया के जरिए इसे परमाणु हथियार के लिए प्लूटोनियम में बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सामग्री को सुरक्षित तरीके से ले जाने योग्य माने जाने के बाद इसे “प्रमाणित कंटेनरों” में किसी तीसरे देश तक पहुंचाया जा सकता है। वहां इसे रासायनिक रूप से अधिक स्थिर और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले रूप में सुरक्षित तरीके से बदला जा सकता है, जिसका संभावित उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में हो सकता है। उन्होंने कहा कि परमाणु सामग्री के किसी भी परिवहन के दौरान चोरी या तोड़फोड़ से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी।
