चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता भारतीय नागरिकों की पहचान में मदद के लिए भारतीय दूतावास ने उनके परिवारों से डीएनए नमूने जमा करने का अनुरोध किया है।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को बताया कि चीन के अधिकारियों ने अब लापता भारतीय नागरिकों के डीएनए नमूने लेने की पुष्टि की है। इसके बाद दूतावास ने लापता लोगों के परिवारों से पहचान प्रक्रिया में मदद के लिए डीएनए नमूने जमा करने को कहा है।
भारतीय दूतावास ने परिवारों से क्या कहा?
दूतावास ने कहा, “चीन जनवादी गणराज्य के अधिकारियों से पुष्टि हुई है कि वे अब 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता भारतीय नागरिकों के डीएनए नमूने प्राप्त करने में सक्षम हैं। भारतीय दूतावास, बीजिंग, लापता भारतीय नागरिकों के परिवारों से पहचान प्रक्रिया में सहायता के लिए डीएनए नमूने जमा करने का अनुरोध करता है।”
डीएनए से जुड़ी जानकारी किस तरह देनी होगी?
- परिवारों से डीएनए से जुड़ी जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीओडीआईएस प्रारूप में भारतीय दूतावास को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
- दूतावास इस जानकारी को तुलना के लिए संबंधित चीनी अधिकारियों को भेजेगा। डीएनए का मिलान होने की पुष्टि होने पर परिवारों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
चीन में लापता विदेशी नागरिकों के लिए पहले क्या व्यवस्था की गई थी?
इससे पहले 30 अगस्त को भारतीय दूतावास ने बताया था कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए 24 घंटे चलने वाली दो अंग्रेजी भाषा की हेल्पलाइन शुरू की हैं।
दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, चीन जनवादी गणराज्य में हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद, तिब्बत के अधिकारियों ने लापता विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी हासिल करने में परिवारों की मदद के लिए 24 घंटे चलने वाली दो समर्पित अंग्रेजी भाषा की हेल्पलाइन शुरू की हैं।”
किन नंबरों पर ले सकते हैं लापता विदेशी नागरिकों की जानकारी?
दूतावास ने इन हेल्पलाइन के नंबर भी साझा किए थे। परिवार 0086-891-6817165 और 0086-183-0802-6705 पर संपर्क कर लापता विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। यह सलाह तिब्बत और पड़ोसी देश नेपाल में भारी तबाही मचाने वाली प्राकृतिक आपदा के बीच जारी की गई है। हिमालय में एक ग्लेशियर के ढहने से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने चीन-नेपाल सीमा से लगे इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है।


