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8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, हर महीने 15,800 तक HRA!

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8वें वेतन आयोग के तहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कर्मचारियों द्वारा नए फिटमेंट फैक्टर और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA को 30% से बढ़ाकर 40% करने का प्रस्ताव रखा गया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने के बाद लेवल 5 के कर्मचारियों को हर महीने 15,768 (लगभग 15,800) रुपये तक बंपर  HRA (मकान किराया भत्ता) मिल सकता है. 

क्या होता है HRA?

HRA या House Rent Allowance) सैलरी का एक हिस्सा है, जो कंपनी अपने कर्मचारियों को उनके रहने या मकान के किराए के खर्च को पूरा करने के लिए देती है. अगर आप किराए के मकान में रहते हैं, तो एचआरए न सिर्फ आपकी जेब का खर्च कम करता है, बल्कि इसके तहत आपको इनकम टैक्स में भी बड़ी छूट मिलती है. अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनते हैं, तो इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आप अपने एचआरए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.

7वें वेतन आयोग में कितना मिल रहा HRA?

सातवें वेतन आयोग में लेवल 5 के एक कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन 29,200 रुपये पर 30% की दर से वर्तमान में 8,760 रुपये प्रति माह HRA मिल रहा है. सरकारी नियमों के मुताबिक, जब महंगाई भत्ता (DA) 50% के पार हो जाता है, तब X-कैटेगरी के शहरों के लिए HRA की दर बढ़कर 30% हो जाती है. चूंकि वर्तमान में DA 50% से ऊपर चल रहा है इसलिए लेवल 5 के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन (29,200 रुपये) का 30% यानी पूरा 8,760 हर महीने केवल मकान के किराए के लिए सरकार से मिल रहा है.

अब कर्मचारी संगठन नए वेतन आयोग में इस बेसिक पे (29,200 रुपये) को बढ़ाकर करीब 61,320 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि HRA की दर को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया जाए. अगर ऐसा होता है, तो यही 8,760 रुपये का भत्ता बढ़कर सीधे 24,528 रुपये हो जाएगा.

HRA को कैसे करते हैं कैलकुलेट?

सरकार और अधिकांश प्राइवेट कंपनियां शहरों को तीन कैटेगरी में बांटकर HRA तय करती हैं:-

X श्रेणी (महानगर – जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु): यहां रहने का खर्च सबसे ज्यादा होता है इसलिए यहां बेसिक सैलरी का सबसे अधिक प्रतिशत (जैसे वर्तमान में सरकारी नियमों में 30%) एचआरए के रूप में मिलता है.

Y श्रेणी (टियर-2 शहर – जैसे लखनऊ, जयपुर, पटना)- यहां मिडियम खर्च होता है इसलिए यहां बेसिक का 20% एचआरए मिलता है.

Z श्रेणी (छोटे शहर या ग्रामीण इलाके)- यहां सबसे कम (बेसिक का 10%) एचआरए दिया जाता है.

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