- सस्ता चीनी माल खुदरा दुकानों तक पहुँचने में 7-10 दिन लगेंगे.
त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी को परेशान कर रखा है. ऐसे में लोगों को इंतजार है कि जल्द से जल्द चीनी के रेट गिर जाए. दाम गिरे भी हैं, लेकिन सिर्फ 2 से 3 रुपये. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले हफ्ते के 65.08 रुपये से घटकर केवल 62.57 प्रति किलो पर आया है. हैरान करने वाली बात यह है कि चीनी के थोक रेट 17 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं.
आम आदमी को नहीं राहत?
यह सच है कि मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी के दामों में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की भारी गिरावट आई है. इसके बावजूद गली-मोहल्ले में परचून की दुकानों पर आम आदमी को सिर्फ 2 से 3 रुपये कम रेट पर चीनी की बिक्री की जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मिलों में चीनी का दाम 67 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर से टूटकर 47 से 55 रुपये प्रति किलो के दायरे में आ चुका है, लेकिन देश का औसत खुदरा भाव अभी भी 62.57 प्रति किलो के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और NFCSF के अनुसार, मिल और रिटेल के बीच अधिकतम 7 से 8 रुपये का ही अंतर होना चाहिए, लेकिन फिर भी आम आदमी को राहत नहीं है.
क्यों सस्ती नहीं हो रही चीनी?
रिटेल स्तर पर चीनी की कीमतें इसलिए कम नहीं हो रही हैं क्योंकि थोक (Wholesalers) और खुदरा दुकानदारों के पास पहले से वह स्टॉक पड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने अगस्त के मध्य में 65 से 67 रुपये प्रति किलो के ऊंचे रेट पर खरीदा था. आमतौर पर एक किराना दुकानदार या छोटा रिटेलर एक बार में चीनी की 10 से 15 बोरियां खरीद कर रखता है.
अब चूंकि उन्होंने यह पुराना स्टॉक 65 से 67 रुपये प्रति किलो के पिछले ऊंचे रेट पर खरीदा था. अब कोई भी दुकानदार अपना नुकसान करके सामान तो बेचेगा नहीं इसलिए वे पुराना महंगा स्टॉक खत्म होने तक कीमतें कम नहीं कर रहे हैं.
चीनी मिलों ने भी साफ कर दिया है कि एक्स-मिल (Ex-mill) रेट गिरने का असर थोक मंडियों पर तुरंत दिखता है, लेकिन उस सस्ते माल को आपके नजदीकी किराना स्टोर तक पहुंचने और खुदरा कीमतों में पूरी तरह बदलाव दिखने में कम से कम 7 से 10 दिन का समय लगता है.
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