प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक बार फिर यूक्रेन युद्ध खत्म करने की अपील की है. 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है और दुनिया को अंतहीन युद्ध से निकलकर युद्ध खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत शांति की दिशा में किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करता है. उन्होंने बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया. यह संदेश इसलिए भी अहम है क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से शुरू हुआ युद्ध अब चार साल से ज्यादा समय से जारी है.
पुतिन के साथ मोदी की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी

बिश्केक में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भी नजर आई. दोनों ने हाथ मिलाया और गले मिले. बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार में भी रवाना हुए. हालांकि, इस दोस्ताना माहौल के बीच पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख भी साफ रखा. उन्होंने कहा कि युद्ध को जारी रखने के बजाय शांति की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है.
‘अंतहीन युद्ध’ खत्म होना चाहिए?- मोदी
पीएम मोदी के इस बयान को भारत की लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है. भारत रूस का करीबी रणनीतिक साझेदार है, लेकिन नई दिल्ली लगातार यह कहती रही है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. पीएम मोदी पहले भी रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की अपील कर चुके हैं. अब बिश्केक में उन्होंने एक बार फिर कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद पैदा करता है.
भारत के लिए रूस और यूक्रेन दोनों महत्वपूर्ण
यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को खत्म नहीं किया. दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग जारी रहा है. भारत ने यूक्रेन के साथ भी बातचीत की है और युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते का समर्थन किया है. यही वजह है कि भारत की नीति को किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के साथ शांति और बातचीत को बढ़ावा देने वाली नीति के रूप में देखा जाता है. 31 अगस्त की बैठक में मोदी और पुतिन ने केवल यूक्रेन युद्ध पर ही चर्चा नहीं की. दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के साथ व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, उर्वरक और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की. दोनों ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र की स्थिति पर भी विचार साझा किए.
4 साल से ज्यादा समय से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था. इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार लड़ाई, मिसाइल और ड्रोन हमले होते रहे हैं. इस युद्ध का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहा है. ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति, व्यापार और समुद्री रास्तों पर भी इसका असर पड़ा है. ब्लैक सी क्षेत्र में जारी तनाव भारत के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि वहां समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. भारत ने पुतिन के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की.
मोदी की ‘युद्ध नहीं, शांति’ वाली नीति
पीएम मोदी का ताजा संदेश उनके पुराने रुख से जुड़ा हुआ है. भारत लगातार कहता रहा है कि रूस-यूक्रेन विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. बिश्केक में मोदी ने इसी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अंतहीन युद्ध की स्थिति से निकलकर युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ना चाहिए. यह संदेश रूस के साथ भारत के मजबूत संबंधों के बीच दिया गया है, इसलिए इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का अहम उदाहरण माना जा रहा है.
पुतिन ने भी मोदी की बात का जवाब दिया
बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी की बात सुनी और कहा कि रूस शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हालांकि रूस का रुख अब भी यही है कि युद्ध का समाधान उसकी सुरक्षा और राजनीतिक शर्तों को ध्यान में रखकर होना चाहिए, जबकि यूक्रेन रूस की कई मांगों को स्वीकार करने से इनकार करता रहा है. ऐसे में युद्ध खत्म करने की राह अभी भी आसान नहीं है. लेकिन भारत की ओर से लगातार बातचीत और शांति का संदेश यह दिखाता है कि नई दिल्ली इस संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत की मेज पर देखना चाहती है.
