नेपाल में बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या 1000 के पार पहुंच गई है. नेपाल के गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि मौत का आंकड़ा 1003 हो गया है. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बताया कि लगभग 4,000 लोग, जिनमें 583 विदेशी और कई सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, अभी भी लापता हैं, जबकि लगभग 12,000 लोगों को बचाया गया है.
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया. भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी निचले इलाकों में ले गई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं.
नेपाल ने रेस्क्यू अभियान में 21,011 सुरक्षाकर्मियों को लगाया है. इसमें नेपाल पुलिस के 7912 लोग शामिल हैं. अहम बात यह भी है कि नेपाल में बाढ़ का नया अलर्ट भी जारी हुआ है.
दुनिया के पापों की कीमत चुका रहा नेपाल – शिशिर खनाल
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि यह सामान्य बाढ़ नहीं, बल्कि एक हिमालयन सुनामी थी. उनका कहना है कि नेपाल दुनिया के पाप की कीमत चुका रहा है. उन्होंने कहा, ‘नेपाल इस विनाशकारी हिमालयन सुनामी के लिए कानूनी जलवायु मुआवजे की मांग क्यों कर रहा है, जिसे उसने खुद नहीं पैदा किया.’
बाढ़ को क्यों कहा जा रहा हिमालयन सुनामी
उन्होंने कहा, ‘यह कोई सामान्य बाढ़ नहीं थी. लहरों की ऊंचाई 20 से 30 मीटर तक पहुंच गई और गति 180 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई. यह बवंडर जैसी गति वाला आपदा था, जिसे कई लोग सही मायने में हिमालयन सुनामी कह रहे हैं. यह आपदा का ऐसा पैमाना है जो नेपाल की जीवित स्मृति से पूरी तरह बाहर है. नेपाल के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग नगण्य हैं. फिर भी हम उस वैश्विक संकट की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं.’
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