डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) से जुड़ी कथित साइबर सुरक्षा घटना को लेकर सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्टों को अधिकारियों ने मंगलवार को भ्रामक और अपुष्ट बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी सक्रिय साइबर हमले, अनधिकृत नेटवर्क घुसपैठ या डेटा चोरी का कोई प्रमाण नहीं मिला है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच की जा चुकी है और फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
क्या था डेटा लीक का दावा?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के डेटा में सेंध लगाई गई है। इन रिपोर्टों के मुताबिक, एक कथित साइबर अपराधी (थ्रेट एक्टर) डार्क वेब पर बड़ी मात्रा में डेटा बेचने की कोशिश कर रहा है। इसी दावे के बाद मामले ने तूल पकड़ा और जांच शुरू की गई।
जांच में क्या सामने आया?
अधिकारियों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के स्तर पर संबंधित एजेंसियों ने कथित डेटा लीक की गहन जांच की। जांच के बाद किसी भी सक्रिय साइबर हमले, नेटवर्क में अनधिकृत घुसपैठ या डेटा चोरी के प्रमाण नहीं मिले। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि अभी किसी भी सक्रिय साइबर हमले, अनधिकृत नेटवर्क घुसपैठ या चल रही डेटा चोरी का कोई सबूत नहीं मिला है।
सरकार ने मीडिया रिपोर्टों पर क्या कहा?
अधिकारी ने कहा कि DRDO से जुड़ी कथित साइबर सुरक्षा घटना को लेकर मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित रिपोर्टें “गलत और बिना पुष्टि वाली” हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी खबरों को लेकर भ्रमित न होने की अपील की।
क्या लीक हुआ डेटा गोपनीय था?
अधिकारियों के मुताबिक, जिस डेटा के लीक होने का दावा किया जा रहा है, उसका अधिकांश हिस्सा गैर-वर्गीकृत है और उसमें किसी प्रकार की गोपनीय जानकारी शामिल नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस डेटा को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, वह वास्तव में वर्ष 2020 से 2022 के दौरान हुए पुराने डेटा ब्रीच से जुड़ा है। अधिकारियों का दावा है कि साइबर अपराधियों ने दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर कर उन्हें नया और गोपनीय दिखाने की कोशिश की है।
क्या कथित दस्तावेज अब भी उपयोग में हैं?
अधिकारियों ने कहा कि कथित तौर पर लीक बताए जा रहे सभी दस्तावेज पुराने हो चुके हैं। इनमें कई बार संशोधन किया जा चुका है और ये अब DRDO की मौजूदा तकनीकी व्यवस्था या कॉन्फ़िगरेशन का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
क्या कई लोग एक ही डेटा बेच रहे हैं?
जांच में यह भी सामने आया कि कई साइबर अपराधी एक ही डेटा को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह डेटा सभी के पास समान है और वर्तमान समय में इसका विभाग या रक्षा मंत्रालय के लिए कोई परिचालन महत्व नहीं है।
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डेटा से छेड़छाड़ क्यों की गई?
अधिकारी के अनुसार, कथित तौर पर लीक किए गए डेटा में साइबर अपराधियों ने जानबूझकर बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य वित्तीय लाभ कमाना, लोगों में दहशत फैलाना, डेटा के नाम पर मोटी रकम वसूलना और उसे असली तथा ताजा दिखाकर खरीदारों को भ्रमित करना है।


