अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान पर बड़े सैन्य हमले रोक दिए हैं। इसकी वजह सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की वह चेतावनी बताई जा रही है, जिसमें कहा गया कि लगातार हमलों से अमेरिका के पास मौजूद पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से घट रहा है। इससे पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
पेंटागन ने क्यों जताई चिंता?
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को व्हाइट हाउस में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में सेना के अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक उम्मीद से ज्यादा तेजी से कम हो रहा है।
संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने ट्रंप को सलाह दी कि अमेरिका बड़े हमले करने में सक्षम है, लेकिन ऐसा करने से पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हथियारों के घटते भंडार पर चिंता जताई।
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ट्रंप ने फिलहाल हमला क्यों रोका?
- पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है।
- पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
- ईरान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकने की धमकी दे रहा है।
- लंबा युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
- खाड़ी देशों ने अमेरिका से संयम बरतने और कूटनीति को मौका देने की अपील की है।
क्या अब बातचीत से निकलेगा रास्ता?
बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत का विकल्प भी खुला है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने भी कहा कि राष्ट्रपति कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि तनाव कम हो और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू हो सके। वहीं, लगातार 13 दिनों की सैन्य कार्रवाई के बाद शनिवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया गया।


