वीर दास ने जताया समर्थन, आर्टिस्ट पर उठाए सवाल
एक्टर और कॉमेडियन वीर दास ने छात्रों के प्रदर्शन पर कई आर्टिस्ट्स की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उनसे सपोर्ट करने की अपील की। वीर दास ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक नोट शेयर किया और कहा कि जो लोग ऐसे मुद्दों को नजरअंदाज करते हैं, वे बाद में उम्मीद करते हैं कि भीड़ उनके सपोर्ट में जमा हो और उनके इवेंट्स में आए। उन्होंने लिखा, ‘अगर आप एक भारतीय लाइव आर्टिस्ट हैं, तो मुझे उम्मीद है कि आप लोगों के लिए आवाज न उठाने और बाद में उन्हें टिकट बेचने की कोशिश करने के पाखंड को समझते होंगे’। आगे कहा है, ‘आप भारतीय जनता की परवाह वाली चीजों पर एक चुप दर्शक की तरह दिखते हैं और फिर उम्मीद करते हैं कि भारतीय जनता आपके लिए आवाज उठाए और आपकी परवाह करे। ऐसा नहीं चलता। भारत में कॉन्सर्ट की इकॉनमी युवाओं के सपोर्ट में जमा होने पर टिकी है’।
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दिलजीत दोसांझ ने किया छात्रों का सपोर्ट
सिंगर एक्टर दिलजीत दोसांझ ने भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है। परीक्षा पेपर लीक व शिक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ आयोजित इस प्रदर्शन के बारे में जब पहले दिलजीत से पूछा गया था, तो एक्टर ने खुद को इससे दूर रखते हुए कहा था कि वे एक कलाकार हैं, राजनेता नहीं। चुप रहने की वजह बताते हुए एक्टर ने मंगलवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक नोट शेयर किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती से पेश नहीं आना चाहिए था। उन्होंने लिखा, ‘आज जो हुआ वह बहुत गलत था। छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। मैं अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने का अनुरोध करता हूं’।
बोले- ‘मुझे कई बार ‘राष्ट्र विरोधी’ कहा गया’
एक्टर ने कहा कि 2020 में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थन करने के बाद उन्हें काफी आलोचना और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि उन्हें अक्सर ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहा जाता रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे पहले भी कई बार ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया जा चुका है। मुझे पता है कि अब भी मुझे राष्ट्र-विरोधी कहा जाएगा। किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद, मुझे बहुत आलोचना और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं अभी भी बात नहीं कर सकता’।
हुमा कुरैशी बोलीं- ‘याद रहेंगे ये विजुअल्स’
अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट साझा किया है। उन्होंने ‘जो कुछ भी हुआ, उसकी तस्वीरें लंबे समय तक मेरे जहन में रहेंगी। प्रदर्शनकारियों पर इतनी बेरहमी और लाठियों का इस्तेमाल देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। यकीनन, इस स्थिति को ज्यादा धैर्य, लोगों की बात सुनकर और बातचीत के जरिए संभाला जा सकता था। हम भारत के लोगों ने ही इस सरकार को चुना है। आज हम सभी को सवाल पूछने और जवाबदेही की उम्मीद है। हमारा देश एक बहुत बड़ा और विविधताओं वाला देश है। जरूरी नहीं कि हम हर मुद्दे पर एक-दूसरे से सहमत हों, लेकिन हम इस बात पर तो सहमत हो ही सकते हैं कि बल प्रयोग करने से पहले हर नागरिक की बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए। उन सभी छात्रों और नागरिकों का सम्मान है, जिन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से खड़े होने का फैसला किया। जय हिंद’।


