व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ काफी प्रभावी रहा। इस कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है और वहां की सत्ता के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ लोग अमेरिका से बातचीत के पक्ष में हैं, जबकि कुछ अब भी सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य सिर्फ सैन्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ईरान को ऐसा समझौता करने के लिए तैयार करना है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय तनाव कम हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान किसी समझौते से पीछे हटता है, तो उसे इसकी कूटनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
कैरोलिन लेविट ने क्या-क्या कहा?
कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान के हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने सभी अंतरराष्ट्रीय वादों का पालन करे। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिका अपने हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी तरह का हमला या बाधा पैदा करने की कोशिश हुई, तो उसका जवाब दिया जाएगा। अमेरिका ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा।
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ईरान अमेरिका तनाव से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- व्हाइट हाउस ने दावा किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा।
- अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया।
- ट्रंप प्रशासन ने कहा कि किसी भी समझौते का पूरी तरह पालन होना चाहिए।
- अमेरिका ने सैन्य दबाव के साथ कूटनीतिक बातचीत का विकल्प भी खुला रखा है।
- व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।
क्या है ट्रंप की रणनीति?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ‘पीस थ्रू स्ट्रेंथ’ (शक्ति के जरिए शांति) की नीति की बात करते रहे हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका एक तरफ अपनी सैन्य तैयारी बनाए रखेगा, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत के लिए भी दरवाजे खुले रखेगा। प्रशासन का दावा है कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।

