Noida Airport Report: करीब 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (पहले फेज़) को शुरू हुए एक महीना पूरा हो गया है. चार हफ्तों के आंकड़े बताते हैं कि एयरपोर्ट पर धीरे-धीरे उड़ानें और यात्रियों की संख्या तो आगे बढ़ रही है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही बड़ा है.
1.2 करोड़ सालाना यात्रियों की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट से पहले महीने में सिर्फ 61 हजार 287 यात्रियों ने सफर किया यानी एयरपोर्ट फिलहाल अपनी क्षमता का करीब 5 फीसदी ही इस्तेमाल कर पा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट पर पूरे दिन में जितनी फ्लाइट्स ऑपरेट होती हैं, उतनी दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर करीब आधे घंटे में उड़ जाती हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जेवर जल्द दिल्ली एयरपोर्ट का मजबूत विकल्प बन पाएगा या इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा?

चार हफ्तों में बदली तस्वीर लेकिन शुरुआत बेहद छोटी
15 जून से 21 जून के बीच एयरपोर्ट पर सिर्फ 86 फ्लाइट मूवमेंट हुए थे. दूसरे हफ्ते में यह संख्या 88 रही. तीसरे हफ्ते में बड़ा उछाल आया और फ्लाइट मूवमेंट बढ़कर 201 हो गए. चौथे हफ्ते यानी 6 से 12 जुलाई के बीच यह आंकड़ा 224 पहुंच गया. यानी पहले हफ्ते के मुकाबले उड़ानों की संख्या करीब तीन गुना हो चुकी है.
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यात्रियों की संख्या भी पहले दिन के 1,427 से बढ़कर एक दिन में करीब 2,800 तक पहुंच गई है. शुरुआत में एयरपोर्ट सिर्फ 5 शहरों से जुड़ा था, अब यह संख्या बढ़कर 15 हो गई है. हालांकि रोजाना औसतन 2500 से 2600 यात्री ही सफर कर रहे हैं, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट पर हर दिन करीब 1,300 फ्लाइट्स ऑपरेट होती हैं.
40 फीसदी यात्री सिर्फ फ्लाइट बदलने वाले
15 जून से 13 जुलाई के बीच एयरपोर्ट से 18 हजार 424 यात्रियों ने उड़ान भरी और 18 हजार 89 यात्री यहां उतरे. लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़ा कनेक्टिंग यात्रियों का है. इस दौरान 11 हजार 732 ट्रांसफर और 13 हजार 42 इन-ट्रांजिट यात्री रहे यानी कुल ट्रैफिक का करीब 40 फीसदी हिस्सा ऐसे यात्रियों का था, जो सिर्फ दूसरी फ्लाइट पकड़ने के लिए जेवर पहुंचे थे. इसका मतलब यह भी है कि स्थानीय यात्रियों की संख्या अभी उम्मीद से काफी कम है.
एयरलाइंस ने भी बदली रणनीति
एयरपोर्ट की शुरुआत तीन एयरलाइंस के साथ हुई थी, लेकिन पहले ही महीने एयर इंडिया एक्सप्रेस ने यहां से अपनी उड़ानें बंद कर दीं. अकासा एयर ने भी बेंगलुरु और नवी मुंबई रूट बंद कर दिए और अब सिर्फ मुंबई के लिए दो फ्लाइट चला रही है.
फिलहाल सबसे बड़ा दांव इंडिगो ने लगाया है. इंडिगो अब जेवर से 15 शहरों के लिए हफ्ते में 105 फ्लाइट्स चला रही है. लखनऊ और जयपुर के लिए दिन में दो-दो उड़ानें हैं. हालांकि कम यात्रियों की वजह से नोएडा-चंडीगढ़ रूट भी बंद करना पड़ा.
सबसे बड़ी बात यह है कि ‘इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ कहलाने वाले जेवर से एक महीने बाद भी कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं हुई है.
ग्राउंड रिपोर्ट- उम्मीद भी है चिंता भी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एयरपोर्ट के बाहर टैक्सी और कैब चालकों से बात हुई. उनका कहना है कि फिलहाल सवारी बहुत कम मिल रही है. एक कैब ड्राइवर ने बताया अभी ज्यादातर लोग ट्रांजिट वाले होते हैं. फ्लाइट से बाहर निकलकर शहर जाने वाले यात्री बहुत कम हैं. कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है.
हालांकि स्थानीय लोगों की राय पूरी तरह निराशाजनक नहीं है. कई लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट अभी नया है. जैसे-जैसे ज्यादा एयरलाइंस आएंगी नए शहर जुड़ेंगे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी.
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कनेक्टिविटी अभी सबसे बड़ी चुनौती
यात्रियों का कहना है कि एयरपोर्ट तक पहुंचना अभी आसान नहीं है. परी चौक के बाद यमुना एक्सप्रेसवे का लंबा सुनसान हिस्सा, खासकर सुबह और रात के समय, लोगों को असहज करता है.
YEIDA एक्सप्रेसवे पर लाइटिंग और दूसरी सुविधाएं बेहतर करने पर काम कर रही है. वहीं NHAI दनकौर के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला इंटरचेंज बना रहा है जिसके 15 अगस्त तक खुलने की उम्मीद है. इससे गाजियाबाद, हापुड़ और आसपास के इलाकों से एयरपोर्ट पहुंचना आसान होगा. हालांकि मेट्रो या रैपिड रेल जैसी सीधी कनेक्टिविटी अभी दूर की बात है.
2030 तक असली परीक्षा
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दिल्ली का IGI एयरपोर्ट अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है. उसकी सालाना क्षमता करीब 11 करोड़ यात्रियों की है लेकिन पिछले साल वहां 8 करोड़ से भी कम यात्रियों ने सफर किया.
दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर यात्रियों के पास अभी भी बेहतर कनेक्टिविटी, ज्यादा उड़ानों और सस्ते सार्वजनिक परिवहन के साथ IGI का विकल्प मौजूद है. इसके अलावा पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने, महंगे एविएशन फ्यूल और कमजोर रुपए जैसी चुनौतियों ने भी एयरलाइंस पर दबाव बढ़ाया है. ऐसे माहौल में नई उड़ानें शुरू करना कंपनियों के लिए आसान नहीं है.
पहले महीने के आंकड़े दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाते हैं. एक तरफ उड़ानों और शहरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, दूसरी तरफ एयरपोर्ट अभी अपनी क्षमता के सिर्फ 5 फीसदी पर चल रहा है.
ग्राउंड पर लोगों में उम्मीद है कि अगर ज्यादा एयरलाइंस जुड़ती हैं अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होती हैं और एयरपोर्ट तक पहुंच आसान बनती है तो आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का बड़ा एविएशन हब बन सकता है. लेकिन फिलहाल इसका सफर अभी सिर्फ शुरू हुआ है.

