संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे करीब 11,000 नाविकों (सीफेयरर्स) को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है, जब क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बनी हुई हैं।
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अमेरिका, ईरान, ओमान के सहयोग से दिया जाएगा अंजाम
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि इस अभियान को ईरान, ओमान, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों, अमेरिका और समुद्री उद्योग के सहयोग से अंजाम दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के लिए जरूरी सुरक्षा गारंटी हासिल कर ली गई है और सुरक्षित नौवहन की सभी परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक आकलन किया गया है। आईएमओ ने अपने बयान में ओमान की ओर से जारी दिशा-निर्देश भी शामिल किए हैं, जिनके आधार पर जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही कर सकेंगे।
संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज में स्थिति सामान्य नहीं
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी के इस संकरे रास्ते से वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है।
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हालांकि क्षेत्र में घोषित संघर्षविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ईरान ने हालिया तनाव और लेबनान में इस्राइल तथा ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच संघर्ष का हवाला देते हुए जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का दावा किया है। ऐसे में फंसे हुए नाविकों की सुरक्षित निकासी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है।


