मान लीजिए आपको अपनी कंपनी के सीईओ के असली व्हाट्सएप नंबर से एक बेहद जरूरी मैसेज आता है, जिसमें किसी गोपनीय प्रोजेक्ट के लिए तुरंत एक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का आदेश हो। मैसेज में वरिष्ठ प्रबंधन का पूरा दबदबा दिखता है, तो आप शायद बिना सोचे पैसे भेज देंगे। लेकिन सावधान, इस तरह आप कॉरपोरेट धोखाधड़ी के नए रूप ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हो सकते हैं। साइबर ठग अब फर्जी ईमेल के बजाय सीधे आपके बॉस का व्हाट्सएप हैक कर कंपनियों का खजाना खाली करने लगे हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने धोखाधड़ी के इस नए और खतरनाक तरीके के बारे में भारतीय कंपनियों को आगाह किया है।
1. ‘बॉस स्कैम’ आखिर क्या है?
‘बॉस स्कैम’ या सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड, बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (बीईसी) का ही एक उन्नत और खतरनाक रूप है। पहले हैकर्स फर्जी ईमेल के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों की नकल करते थे, लेकिन अब वे मैलवेयर और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करके सीईओ के असली व्हाट्सएप अकाउंट का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं।
2. साइबर ठग इस स्कैम को अंजाम कैसे देते हैं?
I4C के मुताबिक, साइबर अपराधी सबसे पहले रिजर्व बैंक (आरबीआई) जैसे रेगुलेटर्स का भेष धरकर वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल या व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते हैं। वे बताते हैं कि एक जरूरी रेगुलेटरी समस्या है और समाधान के लिए एक जिप (ZIP) फाइल भेजते हैं, जिसमें .exe और .dll फाइलें होती हैं। अधिकारी जैसे ही इसे अपने कंप्यूटर पर रन करते हैं, सिस्टम में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है।