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कर्नाटक:पांचवीं सीट के लिए कांग्रेस के पास नहीं थे विधायक, Cm डीके शिवकुमार की इस रणनीति ने बदल दिया पूरा खेल – Congress Dominates In Karnataka Legislative Council Elections Winning Five Out Of Seven Seats Bjp Secures Two

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एक तरफ जहां झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव  में कांग्रेस को जोर का झटका लगा है। वहीं, दूसरी तरफ कर्नाटक में हुए विधान परिषद के चुनाव में पार्टी को मिली जीत ने जरूर उसे राहत दी है। कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। गुरुवार को मतगणना पूरी होने के बाद घोषित परिणामों में कांग्रेस स्पष्ट रूप से सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दो सीटों पर जीत हासिल की, जबकि जनता दल (सेक्युलर) अपनी सीट बचाने में नाकाम रही और उसके उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस के ये पांच उम्मीदवार चुनाव जीते 

कांग्रेस के जिन उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, उनमें बीके हरिप्रसाद, थिप्पन्नाप्पा कामाकानूर, पीवी मोहन, शिवन्ना बीएस (मालवल्ली) और विनय कार्तिक प्रकाश शामिल हैं। दूसरी ओर BJP के लिंगराज पाटिल और रघु आर विजयी रहे। JD(S) के उम्मीदवार गोविंदराजू सातवीं और सबसे अहम मानी जा रही सीट के मुकाबले में पिछड़ गए, जिससे पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा।

 

उच्च सदन में कांग्रेस की बढ़ी ताकत  

इन नतीजों के बाद 75 सदस्यीय कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस की ताकत और बढ़ गई है। अब परिषद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है। BJP के पास 29 सदस्य हैं, जबकि JD(S) की संख्या सात से घटकर छह रह गई है। सदन में एक निर्दलीय सदस्य भी मौजूद है।चुनाव परिणामों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने न केवल अपनी मौजूदा सीटें बरकरार रखीं, बल्कि अतिरिक्त समर्थन जुटाकर पांचवीं सीट भी जीत ली। इससे राज्य की राजनीति में कांग्रेस की पकड़ और मजबूत हुई है।

सहयोगी साथ आए लेकिन जीत नहीं दिला पाए 

इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान JD(S) को हुआ। पार्टी अपने सहयोगी BJP के समर्थन के साथ एक सीट जीतने की उम्मीद कर रही थी। JD(S) नेतृत्व को भरोसा था कि कुछ निर्दलीय विधायक, छोटे दलों के सदस्य और संभवतः अन्य दलों के विधायक भी उसके उम्मीदवार गोविंदराजू के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। पार्टी ने यह भी उम्मीद जताई थी कि कुछ विधायक “अंतरात्मा की आवाज़” के आधार पर वोट करेंगे, लेकिन अंतिम नतीजे उसके पक्ष में नहीं गए। कांग्रेस ने रणनीतिक तरीके से अपने वोटों का प्रबंधन करते हुए सातवीं सीट पर भी कब्जा जमा लिया।

विधानसभा में संख्या बल बना कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत

224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं। BJP के पास 62 विधायक हैं, जबकि JD(S) के खाते में 18 विधायक हैं। इसके अलावा कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष का एक-एक विधायक विधानसभा में मौजूद है। दो निर्दलीय विधायक भी हैं। तीन अन्य सदस्य विभिन्न श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि विधानसभा अध्यक्ष अलग से शामिल हैं। वर्तमान में विधानसभा की दो सीटें रिक्त हैं। इसी संख्या बल ने कांग्रेस को विधान परिषद चुनाव में बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

22 वोट थे पास, फिर भी जीत ली पांचवीं सीट; समझिए पूरा गणित

विधान परिषद चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत कराया गया था। इस प्रणाली के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता थी। कांग्रेस ने अपने पहले चार उम्मीदवारों को आसानी से 28-28 वोट दिलाकर निर्वाचित करा लिया। इसके बाद उसके पास 22 अतिरिक्त वोट शेष थे। पांचवीं सीट जीतने के लिए पार्टी को छह और वोटों की जरूरत थी। कांग्रेस ने निर्दलीय विधायकों और अन्य स्रोतों से समर्थन जुटाकर आवश्यक संख्या पूरी की और अपने पांचवें उम्मीदवार को भी विजयी बनाने में सफलता हासिल की। यही चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

गठबंधन का गणित फेल, कांग्रेस की रणनीति पास

BJP और JD(S) गठबंधन को उम्मीद थी कि उनके संयुक्त वोटों के आधार पर गोविंदराजू को परिषद भेजा जा सकेगा। इसके लिए उन्हें निर्दलीय विधायकों, छोटे दलों और अन्य गैर-संबद्ध सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। गठबंधन की रणनीति इस बात पर भी निर्भर थी कि कोई विधायक क्रॉस-वोटिंग न करे और मतदान के दौरान अनुपस्थित न रहे। हालांकि सभी समीकरण उनके पक्ष में नहीं बैठे और अंततः गोविंदराजू आवश्यक मतों का आंकड़ा नहीं छू सके। दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक प्रबंधन और राजनीतिक रणनीति के दम पर सातवीं सीट भी अपने नाम कर ली।

हर विधायक ने डाला वोट, 100 फीसदी मतदान ने बढ़ाई दिलचस्पी

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में मतदान को लेकर भी विशेष उत्साह देखने को मिला। चुनाव में 100 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और सभी 222 पात्र विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सात रिक्त सीटों के लिए कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे। चूंकि सीटों की संख्या सात थी और उम्मीदवार आठ, इसलिए सातवीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प बन गया था। मतदान गुरुवार, 18 जून को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न हुआ। इसके बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए गए।

ये भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव में एनडीए-झामुमो के उम्मदीवार जीतें, कांग्रेस को लगा झटका; तीन वोटों पर फैसला बाकी

आखिर क्यों कराए गए थे ये चुनाव?

ये चुनाव उन सात सीटों को भरने के लिए आयोजित किए गए थे, जो 30 जून को सात वर्तमान विधान परिषद सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त होने वाली हैं। सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में कांग्रेस के गोविंदराजू, नसीर अहमद, थिप्पन्नाप्पा और बीके हरिप्रसाद शामिल हैं। वहीं BJP के MTB नागराजू, प्रताप सिम्हा नायक और सुनील वल्यापुर भी इसी महीने अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। चुनाव से पहले इन सात सीटों में से चार कांग्रेस, दो BJP और एक JD(S) के पास थीं। ताज़ा परिणामों में कांग्रेस ने अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए पांच सीटें जीत लीं, जबकि JD(S) अपनी एकमात्र सीट बचाने में असफल रही।



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