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पश्चिम बंगाल सियासी ड्रामा:आखिर क्यों खंड-खंड हो रही टीएमसी? – West Bengal Tmc Crisis Abhishek Banerjee Mamata Banerjee Why Did The Tmc Split?

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Bengal TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस का पूरा नाम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस है, लेकिन चुनाव आयोग से उसे क्षेत्रीय दल की मान्यता प्राप्त है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में एक राजनीतिक दल थी या फिर एक निजी कंपनी की तरह संचालित होने वाला संगठन? आलोचकों का आरोप रहा है कि इसकी चेयरपर्सन ममता बनर्जी थीं, मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी, जबकि निर्णय प्रक्रिया पर एक सीमित समूह का प्रभाव था।


तृणमूल कांग्रेस 15 वर्षों तक सत्ता में रही। यही सत्ता उसके संगठनात्मक अंतर्विरोधों को ढकने का सबसे बड़ा कारण थी। सत्ता का आकर्षण और सत्ता का भय दोनों ने नेताओं को पार्टी में बनाए रखा। जो नेता पार्टी छोड़कर गए, उनके साथ प्रशासन और पुलिस का व्यवहार कैसा रहा, यह किसी से छिपा नहीं है। शुभेंदु अधिकारी से लेकर अर्जुन सिंह तक अनेक नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और विभिन्न मामलों में उलझाया गया।

पार्टी से अलग होने वाले प्रमुख नेताओं पर नजर डालें तो 2017 में मुकुल रॉय, 2019 में अर्जुन सिंह, 2020 में शुभेंदु अधिकारी, शिशिर अधिकारी, दिव्येंदु अधिकारी, सब्यसाची दत्ता और जितेंद्र तिवारी, 2021 में दिनेश त्रिवेदी, सोनाली गुहा और राजीव बनर्जी, तथा 2024 में तापस रॉय ने तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ा। इनमें से कुछ नेता बाद में परिस्थितिवश वापस भी लौटे।

ममता बनर्जी के पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों को लेकर यह शिकायत लंबे समय से रही कि अभिषेक बनर्जी के दौर में उनकी भूमिका सीमित होती चली गई। स्वयं ममता बनर्जी भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुकी हैं कि कई लोग उनसे अभिषेक को राजनीति से दूर रखने की सलाह देते थे। दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी की अपनी एक टीम थी, जो संगठन और सत्ता दोनों में प्रभावशाली मानी जाती थी। लेकिन आज वही टीम लगभग अदृश्य दिखाई दे रही है।

डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के दौरान और उसके बाद भी उनके कई करीबी नेता सक्रिय नहीं दिखे। इसके पीछे एक कारण यह भी माना जा सकता है कि इन नेताओं ने अपना राजनीतिक भविष्य अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से जोड़ रखा था। उन्हें उम्मीद थी कि ममता बनर्जी के बाद वही पार्टी और सरकार का नेतृत्व करेंगे। सत्ता परिवर्तन के साथ यह संभावना भी कमजोर पड़ गई।

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