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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी समस्याएं पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी हैं। लंबे समय तक यह माना जाता रहा था कि जो लोग फिट रहते हैं, नियमित व्यायाम करते हैं और खेलों से जुड़े रहते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का खतरा बहुत कम होता है। लेकिन बीते वर्षों में कई युवा एथलीट और क्रिकेटरों में हार्ट अटैक के मामलों ने इस सोच को बदल दिया है।
ताजा मामला कर्नाटक के लिए छह फर्स्ट-क्लास मैच और तीन लिस्ट ए मैच खेलने वाले मीडियम पेसर एस.एल. अक्षय की मौत का है। रविवार सुबह एक लीग मैच खेलते समय दिल का दौरा पड़ने से मैदान पर ही उनकी मौत हो गई। वह मजह 39 वर्ष के थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खेल के दौरान ही उन्हें बेचैनी महसूस हुई और वे मैदान से बाहर चले गए। कुछ ही घंटों के भीतर उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने एक बार फिर से कम उम्र में और एथलीटों में हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे को लेकर कई सवाल उठा दिए हैं।

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एसएल अक्षय
– फोटो : Dodda Ganesh X
पहले भी कई क्रिकेटरों को हुआ है हार्ट अटैक
ये कोई पहला मामला नहीं है जब किसी एथीलीट या क्रिकेटर को हार्ट अटैक हुआ हो।
- वसीम राजा (पाकिस्तान): पूर्व ऑलराउंडर की मैदान पर ही हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
- अवि बरोट (भारत): 29 साल के सौराष्ट्र के विकेटकीपर-बल्लेबाज की अचानक कार्डियक अरेस्ट से मौत।
- इयान फॉली (इंग्लैंड): 30 साल के स्पिनर का मैदान पर आंख में चोट लगने के बाद अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
- अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से पंजाब के फिरोजपुर में खेलते समय बल्लेबाज की हार्ट अटैक से जान चली गई थी।
- बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटर तमीम इकबाल को भी एक मैच के दौरान हार्ट अटैक हुआ, तुरंत उपचार मिलने के कारण वह फिलहाल ठीक हैं।

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हार्ट अटैक का खतरा
– फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अश्वनी प्रकाश कहते हैं, हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले रिपोर्ट सामने आए हैं जहां फिटनेस फ्रीक लोगों को हार्ट अटैक हुआ। सिर्फ बाहरी फिटनेस ही दिल की सेहत की गारंटी नहीं होती।
- फिट दिखने के बावजदू ऐसे कई जोखिम कारक और अंदरूनी बीमारियां हो सकती हैं जिनका पता नहीं चल पाता और समय के साथ वह दिल पर दबाव डालती जाती हैं।
- कई लोगों में दिल की बीमारियों का आनुवंशिक खतरा भी होता है जिसपर ध्यान नहीं दिया जाता और ये मौत का कारण बन सकती है।
- इसके अलावा, इंफ्लेमेशन, इंसुलिन प्रतिरोध, तनाव, ठीक से आराम न मिलना, जोरदार शारीरिक गतिविधि, नींद की कमी, साइलेंट हाइपरटेंशन भी हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

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हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों का कारण
– फोटो : Freepik.com
एथलीटों और फिटनेस फ्रीक लोगों में हार्ट अटैक के कारण
जब तक शरीर कोई गंभीर संकेत नहीं देता, आमतौर पर तब तक हम खुद को स्वस्थ मानते रहते हैं। पर ये अच्छे सेहत की गारंटी नहीं है। यही वजह है नियमित जांच के साथ लाइफस्टाइल और खानपान को ठीक रखा जाए। कुछ स्थितियां एथलीटों और फिटनेस फ्रीक लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं।
पहले से दिल की बीमारियों का पता न चलना
- बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन के अनियमित होने या नसों में प्लाक जमने जैसी कोई समस्या है। आमतौर पर इनके लक्षण शुरुआत में बहुत स्पष्ट भी नहीं होते हैं। ऐसे में व्यायाम करने या फिर खेल के दौरान ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बहुत तेजी से बढ़ जाती है, जिससे दिल और नसों का कमजोर सिस्टम दबाव झेल नहीं पाता और हार्ट अटैक हो सकता है।
बहुत ज्यादा ट्रेनिंग
- शरीर की क्षमता से ज्यादा मेहनत करना और शरीर को पर्याप्त आराम न मिलना भी दिल की मांसपेशियों और सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकता है। इसके अलावा खेल के दौरान शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी दिल की धड़कन में अनियमितता पैदा कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है।

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हृदय रोगों के खतरे को कैसे कम करें?
– फोटो : Freepik.com
सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन
- बहुत ज्यादा कैफीन या अन्य उत्तेजक पदार्थ, प्री-वर्कआउट पाउडर का इस्तेमाल और स्टेरॉयड्स का दिल और नसों पर बहुत नकारात्मक असर होता है। कई लोग शरीर को फिट रखने के लिए लंबे समय तक सप्लीमेंट्स लेते रहते हैं, इससे भी दिल की सेहत को खतरा हो सकता है।
अचानक बहुत ज्यादा मेहनत करना
- लंबे समय तक आराम के बाद अचानक भारी वजन उठाना या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट दिल पर अचानक और बहुत ज्यादा दबाव डालता है। पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल की स्थिति में दिल पर अधिक दबाव की स्थिति हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।
नींद की कमी और मानसिक दबाव
- एथलीट और क्रिकेटरों में लगातार प्रदर्शन का दबाव भी शरीर पर गहरा असर डालता है। क्रॉनिक स्ट्रेस दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती है। इसके अलावा खेल के चक्कर में शरीर को पर्याप्त आराम और नींद न मिल पाने से शरीर में सूजन, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

