जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर धमाका पाकिस्तान में बैठकर शहजाद भट्टी ने किया था। शहजाद ने धमाके से चंद मिनट पहले उमरदीन खान से उस सिम कार्ड का नंबर लिया जो छोटी डिवाइस में डालकर ब्लास्ट में फिट किया गया था। हालांकि मोबाइल में सिम डालकर विस्फोट की वारदात पहले हो चुकी हैं लेकिन छोटी डिवाइस में सिम कार्ड डालकर पाकिस्तान से ट्रिगरिंग करने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हमले में मोबाइल फोन आधारित ट्रिगरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विस्फोटक डिवाइस में सिम फिट कर उसे मौके पर प्लांट किया गया और फिर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर शहजाद भट्टी को सिम नंबर भेजा गया। जैसे ही उस नंबर पर कॉल या संदेश गया, विस्फोट हो गया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह तकनीक इसलिए बेहद खतरनाक मानी जा रही है क्योंकि इसमें किसी लंबे तार, टाइमर या मौके पर मौजूद ऑपरेटर की जरूरत नहीं होती। एक साधारण जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और डेटोनेटर के जरिये आईईडी को हजारों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति भी सक्रिय कर सकता है।
कॉल, मिस्ड कॉल या संदेश के जरिये मॉड्यूल के भीतर पैदा होने वाला विद्युत संकेत (इलेक्ट्रिक सिग्नल) रिले सर्किट को एक्टिवेट करता है, जो फिर डेटोनेटर तक पहुंचता है और मुख्य विस्फोट को ट्रिगर कर देता है।


