भारत और नीदरलैंड के रिश्तों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ एक बेहद खास और महत्वपूर्ण बातचीत की है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच इनोवेशन (नवाचार) और सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) जैसे अहम मुद्दों पर सबसे ज्यादा फोकस रहा।

पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई व्यापक और अहम बातचीत के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री मोदी अपने चार यूरोपीय देशों के दौरे के तहत शुक्रवार को नीदरलैंड के शहर द हेग पहुंचे थे। इस दो दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य कई प्रमुख क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना है।
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इस अहम मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक में भारत और नीदरलैंड के संबंधों में बहुत शानदार और उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस बातचीत के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और कूटनीति के कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। पीएम मोदी ने नीदरलैंड को भारत के सबसे महत्वपूर्ण भागीदारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत बाजार अर्थव्यवस्था और एक जिम्मेदार व्यवहार को साझा करते हैं। जल, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग से दोनों देशों के लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द लागू करने पर भी जोर दिया है।

इस द्विपक्षीय वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले एक दशक (दस वर्षों) में भारत और नीदरलैंड के संबंधों में बहुत शानदार प्रगति हुई है। भारत नीदरलैंड को अपने सबसे महत्वपूर्ण और भरोसेमंद भागीदारों में से एक मानता है। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत बाजार अर्थव्यवस्था और एक जिम्मेदार व्यवहार की एक समान सोच है। इसी सोच के कारण दोनों देश आज एक साथ मिलकर इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
व्यापार और निवेश के मामले में नीदरलैंड भारत के लिए कितना अहम है?
व्यापारिक आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक ठिकानों में से एक है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा विदेशी निवेश के मामले में भी यह यूरोपीय देश भारत के लिए बेहद अहम है। नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने अब तक 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया है। पीएम मोदी ने बैठक में सुझाव दिया कि हमें हर क्षेत्र में नीदरलैंड की बेहतरीन विशेषज्ञता और भारत की तेज गति व कौशल को एक साथ मिलाना चाहिए। उन्होंने नवाचार, निवेश, स्थिरता और रक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया।

डच कंपनियों के सीईओ के साथ पीएम मोदी की बैठक में क्या हुआ?
द्विपक्षीय वार्ता से ठीक पहले, प्रधानमंत्री मोदी और डच पीएम रॉब जेटेन ने ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी डच कंपनियों के प्रमुख सीईओ के साथ एक खास बैठक की। इस दौरान पीएम मोदी ने डच कंपनियों को भारत में निवेश करने का खुला निमंत्रण दिया। उन्होंने विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशने के लिए कहा। पीएम मोदी ने व्यापारिक नेताओं को भरोसा दिलाया कि भारत लगातार नियमों के पालन को आसान बना रहा है और व्यापार करने में सुगमता को बढ़ा रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर पीएम मोदी ने क्या बड़े दावे किए?
व्यापारियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का भारत बड़े पैमाने और स्थिरता का एक मजबूत प्रतीक है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यहां दुनिया का सबसे बड़ा टैलेंट पूल मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा या कनेक्टिविटी के मामले में दुनिया का कोई भी देश भारत की गति का मुकाबला नहीं कर सकता है। पीएम मोदी ने अपनी सरकार के 12 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए कहा कि इन वर्षों में लगातार सुधारों के जरिए देश के आर्थिक डीएनए को पूरी तरह बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, खनन और परमाणु ऊर्जा सहित हर क्षेत्र को अब निजी क्षेत्र के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है।

