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बड़ा कैनवास, विजय वर्मा और 1960 का दौर

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मटका किंग एक प्रेडिक्टेबल कहानी पेश करती है, जिसमें एक आम आदमी सट्टा चलाते-चलाते “मटका किंग” बन जाता है। हालांकि, कहानी का ट्रीटमेंट काफी स्लो और बोरिंग लगता है, जिससे दर्शकों की रुचि धीरे-धीरे कम होती जाती है। 8 एपिसोड होने के बावजूद इसमें ना कोई बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलता है, ना ही ऐसा थ्रिल जो आपको बांधे रखे, और ना ही कोई मजबूत इमोशनल कनेक्शन बन पाता है। Vijay Varma जैसे शानदार एक्टर भी इस बार फीके नजर आते हैं, जबकि Sai Tamhankar और Siddharth Jadhav ने अपने किरदारों में बेहतर प्रभाव छोड़ा है। Nagraj Manjule का डायरेक्शन भी इस बार उतना असरदार नहीं रहा। ओवरऑल, यह एक धीमी, कमजोर और निराशाजनक सीरीज साबित होती है



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