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2033 तक नौसेना को मिलेगी स्वदेशी पनडुब्बी:us-जर्मनी के साथ बढ़ रहा सहयोग, सामरिक मोर्चे पर भारत कितना तैयार? – Navy Chief Dinesh Tripathi On Third Aircraft Carrier Project 75i Submarine Roadmap

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भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 31 मई को रिटायर हो रहे हैं। अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले उन्होंने देश की समुद्री सुरक्षा पर तीन बेहद महत्वपूर्ण बातें कही हैं। शनिवार को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने नए एयरक्राफ्ट कैरियर, स्वदेशी पनडुब्बियों के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरों को लेकर नौसेना का पूरा रोडमैप सामने रखा है। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करके उन्हें हिंद महासागर के सुरक्षा हालातों की पूरी जानकारी भी दी।

तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की रणनीतिक जरूरत

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने साफ किया है कि भारत के लिए विमानवाहक पोत बेहद जरूरी हैं। समुद्र में अपनी ताकत दिखाने और दुश्मनों को डराने के लिए कैरियर बैटल ग्रुप (सीबीजी) मुख्य जरिया हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक भारत के व्यापारिक हित फैले हुए हैं। इन हितों की रक्षा के लिए भारत को तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की सख्त जरूरत है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा उदाहरण दिया। इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप को बहुत तेजी से तैनात किया था। भारत के इस कड़े रुख की वजह से दुश्मन देश की नौसेना पूरी तरह डर गई थी। उसे अपने सारे युद्धपोत अपने बंदरगाहों या मकरान तट के पास ही छिपाकर रखने पड़े थे। नौसेना प्रमुख ने कहा कि एक विमानवाहक पोत समुद्र में भारत की संप्रभु ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक होता है।


2033 तक मिलेगी पहली आधुनिक पनडुब्बी और नए हेलीकॉप्टर

निवर्तमान नौसेना प्रमुख ने पनडुब्बियों को लेकर भी बड़ी खुशखबरी दी है। बहुप्रतीक्षित ‘प्रोजेक्ट 75(I)’ के तहत पहली आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बी साल 2033 तक भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगी। इसके बाद साल 2038 तक हर साल एक-एक पनडुब्बी नौसेना को मिलती रहेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल छह अत्याधुनिक पनडुब्बियां भारत में ही बनाई जा रही हैं। ये सभी पनडुब्बियां ‘एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन’ (एआईपी) तकनीक से लैस होंगी। इसके लिए विदेशी कंपनी भारत को डिजाइन और तकनीक का पूरा ट्रांसफर करेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और जर्मनी की कंपनी के बीच बातचीत चल रही है।

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बहुत जरूरी है। अगले दस साल में भारत की करीब 10 पुरानी पनडुब्बियां रिटायर होने वाली हैं। चीन और पाकिस्तान की नौसेनाएं लगातार अपनी ताकत बढ़ा रही हैं, इसलिए भारत भी पानी के नीचे अपनी ताकत मजबूत कर रहा है। इसके साथ ही भारत परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां भी बना रहा है। हाल ही में नौसेना ने अपनी तीसरी बैलिस्टिक परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भी सेवा में शामिल किया है।

इसके अलावा नौसेना प्रमुख ने ‘एमएच-60आर रोमियो’ मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों की जानकारी दी। भारत ने कुल 24 हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था। इनमें से 15 हेलीकॉप्टर भारत आ चुके हैं और तीन हेलीकॉप्टर जल्द ही भारत पहुंचने वाले हैं। बाकी बचे छह हेलीकॉप्टरों में से तीन का इस्तेमाल अमेरिका में भारतीय क्रू की ट्रेनिंग के लिए हो रहा है और तीन का अमेरिका में विशेष परीक्षण चल रहा है। ये हेलीकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर मारने में माहिर हैं। भविष्य के लिए नौसेना ‘मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग’तकनीक पर काम कर रही है। इसमें इंसानी सैनिक और बिना पायलट वाले ड्रोन एक साथ मिलकर हमला करेंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और देश की ऊर्जा सुरक्षा

एडमिरल त्रिपाठी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्तों पर बढ़ते खतरों को लेकर भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अगर कोई देश युद्ध के मैदान से दूर है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह उसके बुरे नतीजों से बच जाएगा। समुद्री सुरक्षा और देश की ऊर्जा सुरक्षा एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ गया है।

भारत का बहुत बड़ा व्यापार इस रास्ते से होता है। भारतीय नौसेना इन रास्तों की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ चला रही है। नौसेना ने वहां अपनी मौजूदगी और हवाई निगरानी बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। समुद्री डकैती पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई अस्थायी समस्या नहीं है। भारतीय नौसेना साल 2008 से लगातार अपना एक युद्धपोत अदन की खाड़ी में तैनात रखती है। अब तक नौसेना ने 3,800 से अधिक मर्चेंट जहाजों को डाकुओं से सुरक्षित बचाया है। भारत के वित्त मंत्रालय ने भी मई 2026 की आर्थिक समीक्षा में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अगर कोई रुकावट आती है, तो इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।

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