संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि संकट के बीच यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कैप्टन स्मित ने जो साहस दिखाया, वह महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा उदाहरण है।

पर्वतनेनी ने यह बात महात्मा गांधी की जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने की थी कैप्टन स्मित से बात
हरिश पर्वतनेनी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फ्लाईदुबई के बहादुर भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए बात की थी। उन्होंने बताया कि कैप्टन स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान को सुरक्षित उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पर्वतनेनी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित से कहा कि गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के दिन उनका यह साहस महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित खुद हमले का सामना कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने धैर्य और साहस बनाए रखा और विमान को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के लिए प्रयास किया। इस दौरान विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
180 यात्रियों की जान बचाने में निभाई अहम भूमिका
कैप्टन स्मित मच्छार उस फ्लाईदुबई विमान के पायलट थे, जो दुबई से तेल अवीव जा रहा था। विमान में सवार यात्रियों की जान उस समय खतरे में पड़ गई थी, लेकिन कैप्टन स्मित ने स्थिति संभालते हुए विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारने में सफलता हासिल की। प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक भी हो गए थे। प्रधानमंत्री ने उनके साहस, सूझबूझ और विपरीत परिस्थितियों में संयम बनाए रखने की सराहना की थी।
UN में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर
संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान पर्वतनेनी ने कहा कि दुनिया में संघर्ष और अस्थिरता के मौजूदा दौर में महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी के लिए अहिंसा केवल हिंसा से दूर रहने का विचार नहीं था, बल्कि यह सत्य, न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति अनुशासित प्रतिबद्धता थी। उन्होंने गरीबी, शोषण और असमानता को भी हिंसा के अलग-अलग रूपों से जोड़ा।
‘सर्वोदय’ और आत्मनिर्भरता का भी किया जिक्र
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने गांधी के सर्वोदय के विचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समावेशी, समान और टिकाऊ विकास की मौजूदा जरूरत से जुड़ा है। उन्होंने गांधी के पर्यावरण संबंधी विचारों और आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की उनकी सोच को भी आज की दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, जलवायु संबंधी चुनौतियों और वैश्विक व्यवधानों के दौर में ये विचार प्रासंगिक बने हुए हैं।
‘अहिंसा सबसे शक्तिशाली हथियार’
पर्वतनेनी ने कहा कि गांधी की अहिंसा आज भी संयुक्त राष्ट्र के काम के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संघर्ष और विभाजन के दौर में अहिंसा के सिद्धांत को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांधी द्वारा दिया गया अहिंसा का सिद्धांत सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक है और दुनिया में मौजूद विनाशकारी एवं अस्थिर करने वाली ताकतों के बीच यह शांति की दिशा दिखा सकता है। कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को और उरुग्वे के स्थायी प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न देशों के मिशनों के सदस्य भी मौजूद रहे।
