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स्विट्जरलैंड में हाई-वोल्टेज ड्रामा! ईरान-अमेरिका बातचीत पर गहराया संकट, जानें ऐसा क्या हुआ कि 80 मिनट ही हो पाई बात

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स्विट्जरलैंड में रविवार (21 जून 2026) को ईरान और अमेरिका के बीच मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत का माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रहा, हालांकि दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों पर सहमति बन गई है. लेबनान को लेकर मतभेद और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बातचीत कुछ समय के लिए रोक दी गई, कुछ टेंशन के बाद मीटिंग का रिजल्ट पॉजिटिव रहा. इस बैठक में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हुए. ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया.

पहले दौर की बातचीत हाल ही में हुए एक अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई, जिसका मकसद पिछले 4 महीनों से चल रहे तनाव और संघर्ष को कम करना है. साथ ही दोनों देश एक बड़े और स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. इसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय विवाद जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं. बातचीत शुरू होने से पहले ईरान ने यह साफ कर दिया था कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब अमेरिका अपने वादों को पूरा करेगा. मीटिंग के बीच ईरान ने यह भी कहा है कि अगर लेबनान में संघर्ष नहीं रुका तो बाकी मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी.

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पहले दौर की बातचीत कितनी देर चली?

पहले दौर की बातचीत करीब 80 मिनट चली. ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरान युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज की गई प्रोपर्टी को रिलीज करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ईरानी तेल एक्सपोर्ट पर लगे बैन में ढील देने के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क लगभग तैयार है. साथ ही कतर की मदद से फ्रीज फंड रिलीज करने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई. तनाव तब बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगियों को रोके, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. इसके बाद ईरानी डेलिगेशन ने विरोध जताया और कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चला गया. ईरानी मीडिया के मुताबिक यह ट्रंप के बयान के विरोध में किया गया था.

बेंजामिन नेतन्याहू ने कर दिया इशारा

मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयान बेहद सावधानी से देने चाहिए. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है. जेडी वेंस ने माहौल शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत में तनाव आना सामान्य बात है और बातचीत अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होती, लेकिन अमेरिका क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है. 

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