- ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान सितंबर में BRICS बैठक के लिए दिल्ली आएंगे।
- यह यात्रा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- ईरान पश्चिमी एशिया में शांति हेतु भारत की भूमिका चाहता है।
- ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना, यह अहम दौरा है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ जारी संघर्ष और तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान इस साल भारत में आयोजित होने वाली ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली आने वाले हैं.
न्यूज एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की बैठक में भाग लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अगले महीने सितंबर में नई दिल्ली की यात्रा करेंगे. पेजेशकियान की ये नई दिल्ली यात्रा ऐसे समय पर होने वाली है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लगातार संघर्ष और तनाव की स्थिति बनी हुई है.
भारत की BRICS मेजबानी में ईरानी राष्ट्रपति का दौरा महत्वपूर्ण
पेजेशकियान का यह नई दिल्ली दौरा इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि साल 2026 में भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की बैठक की मेजबानी कर रहा है और भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स समिट का थीम ‘बिल्डिंग फॉर रिजीलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनिबिलिटी’ रखा गया है.
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात अक्टूबर, 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई थी. दोनों देशों के नेताओं ने इस दौरान द्विपक्षीय बैठक भी की थी, जहां उन्होंने द्विपक्षीय के साथ-साथ क्षेत्रीय विषयों पर भी गंभीर और विस्तृत चर्चा की थी. साल 2024 में ही ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बना था.
अमेरिका के साथ युद्ध में भारत को कैसे देखता है ईरान?
पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ जारी संघर्ष में ईरान भारत को मिडिल ईस्ट में तनाव करने की कोशिशों में एक संभावित भागीदार के रूप में देखता है. इस साल जून महीने में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस संबंध में संकेत दिए थे. उन्होंने कहा था नई दिल्ली पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था, ‘तेहरान इस युद्ध को खत्म करने के लिए किसी सैन्य अभियान को समाधान के तौर पर नहीं देखता है और यह मानता है कि इस संघर्ष को सिर्फ और सिर्फ बातचीत के जरिए ही पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है और हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे.’
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