
Loan Guarantor Rule: गारंटर भरेगा बैंक का लोन, जानिए क्या कहता है हाई कोर्ट का फैसला अगर आपने किसी के लोन में गारंटी दी है तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. लोन लेने वाला व्यक्ति अगर बैंक का पैसा नहीं चुकाता है तो बैंक गारंटर से भी बकाया रकम की वसूली कर सकता है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बैंक को गारंटर से पैसा लेने से पहले मुख्य कर्जदार से वसूली करना जरूरी नहीं है.
मामला दो गारंटरों से जुड़ा है, जिन्होंने अपने साथी के लोन की गारंटी दी थी. कर्जदार ने साल 2022-23 में 50 हजार रुपये का फेस्टिवल लोन, 3 लाख रुपये का शॉर्ट-टर्म लोन और 18 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था. बाद में कर्जदार ने लोन के पैसे नहीं दिए और बैंक का पैसा बकाया रह गया.
गारंटर की सैलरी से कटने थे 10 हजार
इसके बाद बैंक ने गारंटरों से भी बकाया पैसे की वसूली की कार्रवाई शुरू की. बैंक ने गारंटरों की सैलरी से हर महीने 10 हजार रुपये काटने की मांग की थी. गारंटरों ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया. उनका कहना था कि बैंक को पहले मुख्य कर्जदार से पैसा वसूलना चाहिए और उसके बाद ही गारंटर से पैसे मांगी जानी चाहिए.
हाई कोर्ट ने गारंटरों की इस दलील को नहीं माना. कोर्ट ने इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872 की धारा 128 का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर गारंटर की जिम्मेदारी मुख्य कर्जदार के बराबर होती है. इसलिए बैंक कर्जदार या गारंटर, दोनों में से किसी से भी बकाया पैसे मांग सकता है.
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पहले कर्जदार से वसूली जरूरी नहीं
कोर्ट ने कहा कि अगर गारंटी एग्रीमेंट में कोई अलग शर्त नहीं है, तो बैंक के लिए पहले मुख्य कर्जदार से पैसा वसूलना जरूरी नहीं है. यानी लोन डिफॉल्ट होने पर बैंक सीधे गारंटर से भी अपना पैसा वसूल सकता है.
हाई कोर्ट ने बैंक की कार्रवाई को सही माना और गारंटरों की याचिकाएं खारिज कर दीं. इस फैसले से साफ है कि किसी के लोन का गारंटर बनने से पहले गारंटी की शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है. कर्जदार के लोन नहीं चुकाने पर गारंटर पर भी पैसा चुकाने की जिम्मेदारी आ सकती है.
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