तृणमूल सांसद और जाने-माने फिल्मी सितारे शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि विपक्ष बहुत भाग्यशाली है कि राहुल गांधी जैसा तेजतर्रार और दबंग नेता लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया में होने वाली धांधली को देश के सामने खोलकर रख दिया।

राहुल अकेले सौ पर भारी हैं। शत्रुघ्न ने यह भी कहा कि वह अभिषेक बनर्जी की वजह से नहीं बल्कि ममता बनर्जी की वजह से तृणमूल कांग्रेस में आए और उन्हें ही अपना नेता मानते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के मुताबिक, जब भाजपा में संवाद के नाम पर उनकी उपेक्षा हुई तो उन्होंने उसे छोड़ा। भाजपा ने उन्हें नहीं निकाला। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि अटल आडवाणी की भाजपा में लोकशाही थी अब तानाशाही है। सिन्हा ने यह सारी बातें अमर उजाला डॉटकॉम के कार्यक्रम खरी बात में दिए साक्षात्कार में कहीं।
बंगाल में ममता की हार की वजह वह एसआईआर के जरिये लाखों मतदाताओं के नाम कटने, बेतहाशा केंद्रीय सुरक्षा बल लगाने और चुनाव आयोग की तरफ से ऊपर से नीचे तक अधिकारियों के अंधाधुंध तबादलों को मानते हैं। सिन्हा का आरोप है, चुनाव आयोग ने तृणमूल को हराने के लिए भाजपा की खुलकर मदद की। उन्होंने ममता का साथ छोड़ने वाले सांसदों और विधायकों को भी आड़े हाथों लिया। बिहार में बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को एक नई परिवर्तनकारी राजनीति की शुरुआत बताया।
टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं
शत्रुघ्न सिन्हा कहते हैं, ममता जी ने मेरा कठिन समय में साथ दिया इसलिए उनके कठिन समय में मैं उनका साथ नहीं छोड़ सकता। इसलिए मैने कहा कि टिकाऊ हूं बिकाऊ नहीं हूं। जो लोग गए हैं, मैं उनके खिलाफ ज्यादा नहीं बोलूंगा। मैने सारा ड्रामा देखा है कि कैसे कुछ सांसद ममता जी की नकल करती थीं। उनकी तरह रैंप पर चलना और खुद को उनकी चमची साबित करना। अभिषेक बनर्जी पहले बहुत अच्छे थे और चुनाव के बाद अचानक खराब हो गए। सब कहते थे कि अभिषेक बहुत अच्छा बोलते हैं। संसद में शायद एक-दो वक्ता ही उनके जैसे होंगे। पर अचानक अभिषेक बनर्जी खलनायक हो गए।
जेपी, नानाजी से प्रभावित होकर राजनीति में आए
सिन्हा बताते हैं कि राजनीति में वह जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रभावित होने की वजह से आए और इसमें नानाजी देशमुख की प्रमुख भूमिका थी। उन्होंने ही सिन्हा को अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से मिलवाया था। शत्रुघ्न कहते हैं कि उनको लेकर बिहार में लालू यादव जो अब उनके बहुत अच्छे दोस्त हैं और कुछ अन्य नेताओं में असुरक्षा की भावना थी कि अगर ये आ गया तो उनका क्या होगा।
भाजपा में पहले संवाद होता था अब तानाशाही
पहले और आज की भाजपा की तुलना करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा कहते हैं कि पहले भाजपा में संवाद होता था, अब सब ऊपर से तय होता है। तब लोकशाही थी अब तानाशाही है। सिन्हा बताते हैं कि 2014 के चुनाव के बाद उन्हें यह संकेत था कि सरकार में कोई जिम्मेदारी मिलेगी। यहां तक, मीडिया में स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर मेरा नाम भी चलने लगा। सिन्हा कहते हैं कि वह प्रधानमंत्री से मिले तो उन्होंने कहा कि संवाद किया जाएगा। बार-बार यही कहा गया कि संवाद होगा। बिहार में पटना में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम श्रीकृष्ण सभागार में हुआ वह बतौर स्थानीय सांसद उसमें शामिल हुए। वहां भी कहा गया कि संवाद होगा। शाम को मुजफ्फरपुर के कार्यक्रम में सबको बुलाया गया लेकिन उन्हें नहीं बुलाया गया। वह समझ गए कि संवाद ही होगा। इसके बाद उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला कर लिया।

