मोबाइल फोन पर घंटों बिताना, जंक फूड की आदत और शारीरिक गतिविधि कम होना किशोरियों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इसका असर हार्मोन पर भी दिख रहा है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) इसी से जुड़ी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहा है।
एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों ने 4000 स्कूली बच्चियों पर अध्ययन शुरू किया है। इसकी शुरुआती रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसमें पता चला है कि हर 100 में से करीब 3 से 8 किशोरियों में पीसीओएस की समस्या है। वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा करीब 5 से 18 फीसदी तक मिला।
एम्स की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. रजनी शर्मा के मुताबिक, बदलती जीवनशैली से किशोरियों में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रहीं हैं। ज्यादा कैलोरी वाला भोजन, मीठे और प्रॉसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की गड़बड़ी आने वाले दिनों में इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
मोबाइल और जंक फूड के साथ कम हो रही शारीरिक गतिविधि
एम्स की एनाटॉमी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रीमा दादा ने बताया कि पीसीओएस समस्या को केवल किसी एक कारण से नहीं जोड़ा जा सकता। आनुवंशिक कारणों के साथ बचपन की परिस्थितियां, हार्मोन, खानपान और जीवनशैली भी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बचाव का सबसे अच्छा तरीका अनियंत्रित स्क्रीन टाइम पर रोक लगाना, हेल्दी भोजन लेना और नियमित योग करना है। डॉ. रीमा के अनुसार, योग से अनियमित माहवारी जैसी समस्या को भी रोका जा सकता है।

