लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

आज बिमल गुरुंग और Cm शुभेंदु की मुलाकात:क्या दार्जिलिंग में शुरू होगा नया सियासी अध्याय, किन मुद्दों पर बात? – Bimal Gurung To Meet Bengal Cm Subhendu Adhikari Today These Issues Might Be Discussed In Meeting

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात करेंगे। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली उच्चस्तरीय बैठक होगी। यह मुलाकात दार्जिलिंग की पहाड़ियों के साथ नए सिरे से राजनीतिक और विकासात्मक संवाद शुरू होने के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

आखिर बैठक में बिमल गुरुंग कौन-कौन से मुद्दे उठाएंगे?

मंगलवार को कोलकाता पहुंचकर मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले बिमल गुरुंग ने कहा कि वह पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े कई अहम मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। इनमें राशन कार्ड विवाद, बेरोजगारी, व्यावसायिक वाहन चालकों की समस्याएं, चाय बागान और सिनकोना बागान के श्रमिकों की परेशानियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। GJM प्रमुख ने कहा, ‘केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने से हमें उम्मीद है कि गोरखा समुदाय को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।’ 

क्या इस बार गोरखालैंड की मांग उठेगी?

हालांकि, बिमल गुरुंग ने इस बार अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का कोई उल्लेख नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने शासन व्यवस्था, विकास और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद उनके रुख में आए इस बदलाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बैठक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हालिया उत्तर बंगाल दौरे के बाद हो रही है। दौरे के दौरान उन्होंने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर पहाड़ी क्षेत्रों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था। साथ ही गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) के कामकाज में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए क्षेत्र के तेज़ विकास का भरोसा भी दिलाया था।

राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को कितना अहम मान रहे हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसे नई भाजपा सरकार की उस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करना चाहती है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां बिमल गुरुंग के संगठन का खुला समर्थन मिला था।

चुनाव में भाजपा के लिए गुरुंग की क्या भूमिका रही थी?

विधानसभा चुनाव के दौरान बिमल गुरुंग दार्जिलिंग की पहाड़ियों में भाजपा के सबसे प्रभावशाली सहयोगियों में शामिल रहे। उन्होंने पूरे क्षेत्र में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने और गोरखा बहुल इलाकों में भाजपा की स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

क्या दोनों नेताओं के बीच पहले भी नजदीकियां दिख चुकी हैं?

हाल के दिनों में दोनों नेताओं ने उत्तर बंगाल के दौरे के दौरान एक ही मंच साझा किया था। भाजपा की चुनावी जीत के बाद दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे का अभिवादन भी किया था, जिसे राज्य सरकार और GJM के बीच बेहतर तालमेल के संकेत के रूप में देखा गया।

नेपाली भाषा को लेकर गुरुंग ने क्या मांग रखी है?

यह बैठक गुरुंग की हालिया पहल के कारण भी अहम मानी जा रही है। पिछले सप्ताह उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स में सरकारी कामकाज, सरकारी फॉर्म और आधिकारिक पत्राचार में बंगाली के साथ-साथ नेपाली भाषा को भी मान्यता दी जाए। उनका कहना था कि इससे बड़ी नेपाली भाषी आबादी के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

सरकार को लिखे पत्र में गुरुंग ने क्या कहा?

अपने पत्र में गुरुंग ने सरकारी कामकाज में बंगाली भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के राज्य सरकार के फैसले का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने आग्रह किया कि पहाड़ी क्षेत्रों की भाषाई वास्तविकता को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नेपाली भाषा इस क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों की मातृभाषा है और उनमें से कई लोग बंगाली भाषा में पूरी तरह दक्ष नहीं हैं।

गोरखालैंड आंदोलन का इतिहास कितना पुराना है?

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब गोरखालैंड आंदोलन करीब चार दशक से उत्तर बंगाल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। 1980 के दशक में सुभाष घिसिंग के नेतृत्व वाले गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के हिंसक आंदोलन से लेकर बाद में बिमल गुरुंग के नेतृत्व में चले आंदोलनों तक, अलग गोरखालैंड राज्य की मांग दार्जिलिंग की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा रही है।

ये भी पढ़ें: NEET Paper Leak: CBI ने दाखिल की 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, फास्ट ट्रैक अदालत कल करेगी सुनवाई

दार्जिलिंग की राजनीति में भाजपा की भूमिका क्या रही है?

भाजपा ने वर्ष 2009 में पहाड़ी दलों के साथ गठबंधन कर दार्जिलिंग की राजनीति में प्रवेश किया था। तब से पार्टी लगातार दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बनाए हुए है। भाजपा लंबे समय से गोरखा समुदाय की आकांक्षाओं के लिए ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ का वादा करती रही है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार चुनावी समर्थन मिलने के बावजूद पार्टी ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का खुलकर समर्थन नहीं किया है। उसने अब तक “स्थायी राजनीतिक समाधान” की बात तो की है, लेकिन उसके स्वरूप को स्पष्ट नहीं किया है।

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Ayodhya:चंपत ने माना…चढ़ावा चोरी के 81 लाख रुपये की हुई वापसी, पहली बार सामने आए इस्तीफे में किया स्वीकार – Ayodhya: Champat Confirms… ₹81 Lakh Stolen From Offerings Recovered.

Kanwar Yatra:आज सुबह 8 बजे से रूट डायवर्जन लागू, कल से नमो भारत के 52 अतिरिक्त फेरे; पूरी जानकारी इस खबर में – Kanwar Yatra: Route Diversions In Effect From 8 Am Today; 52 Additional ‘namo Bharat’ Trips Starting 30 July

जेन-जी से आगे:यूपी के फतेहपुर में सरकारी स्कूल के बच्चों ने दिखाए तेवर, सड़क पर उतरकर प्रशासन को झुकाया – Government School Students In Up’s Fatehpur Take To The Streets And Force The Administration To Yield.

West Asia Tension Live:ईरान ने यूक्रेन से हर्जाना मांगा, होर्मुज पर भी अड़ा तेरान; पश्चिम एशिया में शांति कब? – West Asia Tension Us Iran War Hormuz Irgc Centcom Trump Airstrikes Missiles Gulf Nations Crude Crisis News

E20 Petrol:ई20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं? सरकार ने बताई इथेनॉल की कीमत, 20% ब्लेंडिंग और आगे की पूरी रणनीति – Why Isn’t E20 Petrol Cheaper Than Regular Petrol? Government Explains Ethanol Pricing, Future Blending Plans

Bhopal Farmers Protest:किसानों का सड़क पर डेरा, दाल-बाटी बनाया; कहा- मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे – Bhopal Farmers Protest Live Demonstrators Reach Ashima Mall Eyes To March Towards Cm House

Leave a Comment